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Jamshedpur News: महिला आरक्षी के कथित शोषण मामले में जांच के दायरे से पेन ड्राइव गायब, फंस सकते हैं जांच अधिकारी

महिला आरक्षी के भाई ने दूसरी जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चार सदस्यीय जांच कमेटी में सभी सदस्यों की सहमति नहीं थी और केवल दो सदस्यों के हस्ताक्षर के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

by Mujtaba Haider Rizvi
बहरागोड़ा की महिला आरक्षी से शोषण का मामला
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Jamshedpur : बहरागोड़ा में पदस्थापित महिला आरक्षी से कथित छेड़खानी और अनुचित व्यवहार के मामले में जांच के दायरे से सुबूतों से भरी पेन ड्राइव गायब कर दी गई है। अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पेन ड्राइव गायब होने के इस मामले में जांच अधिकारी फंसते नजर आ रहे हैं।महिला आरक्षी के भाई ने पोटका विधायक संजीव सरदार को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। आवेदन में संबंधित पुलिस पदाधिकारी पवन कुमार के खिलाफ हुई पूर्व विभागीय जांच और बाद में उन्हें फिर थाना प्रभारी बनाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

पहली जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने का दावा

आवेदन के अनुसार, महिला आरक्षी ने पवन कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत की थी। इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच कराई गई। शिकायतकर्ता के भाई का दावा है कि पहली जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होने की बात दर्ज की गई थी। जांच के दौरान बयान, सीडीआर, टावर लोकेशन और अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण किए जाने का उल्लेख आवेदन में किया गया है।

दूसरी जांच पर उठाए सवाल

महिला आरक्षी के भाई ने दूसरी जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चार सदस्यीय जांच कमेटी में सभी सदस्यों की सहमति नहीं थी और केवल दो सदस्यों के हस्ताक्षर के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि महिला आरक्षी की ओर से उपलब्ध कराई गई कुछ सामग्री, जिसमें पेनड्राइव में दी गई रिकॉर्डिंग भी शामिल थी, का जांच रिपोर्ट में उल्लेख नहीं किया गया। भाई ने आरोप लगाया कि संबंधित साक्ष्य को जांच रिपोर्ट से हटा दिया गया। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

निष्पक्ष अधिकारी से दोबारा जांच की मांग

आवेदन में पूरे मामले की दोबारा जांच किसी सक्षम और निष्पक्ष अधिकारी से कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता के भाई ने कहा है कि महिला आरक्षी के आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की नियमानुसार फिर से जांच की जाए तथा विभागीय कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

जांच पूरी होने तक महत्वपूर्ण पद नहीं देने की मांग

रोहित मसीहा लकड़ा ने यह भी मांग की है कि जांच और विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक संबंधित पदाधिकारी को ऐसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात नहीं किया जाए, जिससे शिकायतकर्ता पर किसी तरह का दबाव पड़ने की आशंका हो। उन्होंने महिला आरक्षी को प्रताड़ना, दबाव या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने और निष्पक्ष माहौल में ड्यूटी करने का अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है।

मुख्यमंत्री और डीजीपी के समक्ष मामला रखने की बात

पोटका विधायक संजीव सरदार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि शिकायत और उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह मामले को मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, डीजीपी और महिला आयोग के समक्ष रखेंगे तथा मुख्यमंत्री से आवश्यक कार्रवाई का आग्रह करेंगे।

विधायक ने कहा कि किसी कर्मचारी या महिला पुलिसकर्मी को शिकायत करने के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मामले की वास्तविकता जांच के माध्यम से सामने आने और यदि कोई शिकायत लंबित है तो उसका निष्पक्ष एवं समयबद्ध निपटारा किए जाने की बात कही।

एसटी समुदाय से आती हैं महिला आरक्षी

आवेदन में बताया गया है कि महिला आरक्षी आदर्श लकड़ा एसटी समुदाय से आती हैं। उनके भाई ने विधायक से आग्रह किया है कि मामले को केवल विभागीय विवाद मानकर समाप्त न किया जाए, बल्कि उपलब्ध जांच रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराकर महिला आरक्षी को न्याय और उचित संरक्षण दिया जाए।

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