
रांची : देश भर के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक अहम खबर सामने आई है। राज्य विद्युत नियामक आयोगों में महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली रहने के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। अदालत ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए झारखंड समेत देश के 16 राज्यों को आधिकारिक रूप से नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की खंडपीठ ने ‘एनर्जी वॉचडॉग’ द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया है। याचिका में यह मुख्य रूप से उठाया गया था कि विभिन्न राज्यों के नियामक आयोगों में कई अहम पद रिक्त होने के कारण आम बिजली उपभोक्ताओं को समय पर न्याय और राहत नहीं मिल पा रही है।
झारखंड में तकनीकी सदस्य का पद खाली, कामकाज पर असर
इस पूरे मामले में झारखंड की स्थिति भी खासी चर्चा में है। राज्य के विद्युत नियामक आयोग में अध्यक्ष और एक सदस्य का पद भले ही भरा हुआ है, लेकिन ‘सदस्य तकनीकी’ का महत्वपूर्ण पद काफी समय से रिक्त चल रहा है। जानकारों का मानना है कि तकनीकी मामलों के विशेषज्ञ इस अहम पद के खाली रहने से आयोग के रोजमर्रा के कामकाज और फैसलों की प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है, जिससे बिजली से जुड़ी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस पाने वाले अन्य राज्यों और क्षेत्रों में आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मेघालय और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। अब इन सभी संबंधित सरकारों को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।
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