
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत देश भर में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘सुजल ग्राम संवाद’ के 12वें संस्करण के लिए झारखंड से पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड स्थित ईटोर पंचायत के बोरोडोरो गांव का चयन किया गया है। आगामी 28 अक्टूबर 2026 को होने वाले इस राष्ट्रीय स्तर के वर्चुअल कार्यक्रम में बोरोडोरो गांव के स्थानीय प्रतिनिधि, जलसहिया और अन्य प्रमुख हितधारक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। राष्ट्रीय मंच पर जिले के किसी गांव का प्रतिनिधित्व करना पूरे पश्चिमी सिंहभूम वासियों के लिए बेहद गर्व की बात है।
उपायुक्त ने लिया तैयारियों का जायजा
इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के सफल और त्रुटिहीन आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्त मनीष कुमार ने स्वयं बोरोडोरो गांव का दौरा किया। उनके साथ पोड़ाहाट-चक्रधरपुर की अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी, चक्रधरपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी कंचन मुखर्जी और पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने धरातल पर चल रही तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को कार्यक्रम के सुचारु संचालन, तमाम जरूरी सुविधाओं की पुख्ता व्यवस्था तथा ग्रामीणों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।
जल सेवाओं और जनभागीदारी पर होगा विशेष मंथन
इस दौरान उपायुक्त मनीष कुमार ने मीडिया और अधिकारियों से बातचीत करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य सिर्फ ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल पहुंचाना ही नहीं, बल्कि जलापूर्ति प्रणालियों का सही रखरखाव और उसमें जनभागीदारी को बढ़ावा देना भी है। ‘सुजल ग्राम संवाद’ जैसे राष्ट्रीय मंच ग्रामीणों को अपने अनुभव साझा करने, अपनी सफलताओं को रेखांकित करने और पेयजल व्यवस्था को और अधिक उन्नत बनाने के लिए अपने विचार रखने का बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इस संवाद सत्र के दौरान मुख्य रूप से ‘जल सेवा आकलन’ और ‘जल अर्पण’ गतिविधियों पर विशेष रूप से दोतरफा चर्चा की जाएगी। इसमें जमीनी स्तर पर पेयजल सेवाओं की वास्तविक स्थिति, जलापूर्ति का प्रबंधन और इसमें स्थानीय समुदाय की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। इसका मुख्य उद्देश्य जमीनी अनुभवों और सुझावों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को अधिक मजबूत और दीर्घकालिक बनाना है।
समुदाय की सक्रियता पर जोर
उपायुक्त ने अधिकारियों को यह आदेश दिया कि तय समय-सीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। साथ ही, जलसहिया, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सक्रिय उपस्थिति से इस संवाद को अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जल संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और योजनाओं के सुचारु संचालन में जन-सहभागिता सबसे अहम है, इसलिए ग्रामीणों को इन कार्यों के प्रति लगातार जागरूक और प्रेरित करते रहना चाहिए।

