
रांची: चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की कानूनी मुश्किलें और उम्मीदें इन दिनों झारखंड हाईकोर्ट में टिकी हैं। मंगलवार को देवघर कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े एक अहम मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई का दौर औपचारिक तौर पर शुरू हो गया। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में लालू की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने अपनी दलीलें रखनी शुरू कर दी हैं।
पूरा मामला नब्बे के दशक का है। साल 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से पशु चारे के नाम पर करीब 89 लाख रुपये से ज्यादा की अवैध निकासी का आरोप है। सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में लालू प्रसाद को दोषी मानते हुए उन्हें साढ़े तीन साल जेल की सजा और पांच लाख रुपये का जुर्माना सुनाया था। निचली अदालत के इसी फैसले के खिलाफ लालू यादव ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील याचिका दाखिल की है, जिस पर अब नए सिरे से सुनवाई तेज हुई है।
बचाव पक्ष ने रखे पुराने दस्तावेज
मंगलवार को कोर्ट की कार्यवाही के दौरान लालू यादव की तरफ से पेश हुए वकीलों-प्रभात कुमार और देवर्षि मंडल ने इस पुराने कानूनी विवाद के इतिहास और दस्तावेजों को अदालत के सामने रखना शुरू किया। हालांकि, पहले दिन की बहस पूरी नहीं हो पाई है, जिसे देखते हुए अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तारीख तय की है। दूसरी ओर, सीबीआई की तरफ से वकील दीपक भारती अदालत में मौजूद रहे।
सुप्रीम कोर्ट की हिदायत के बाद बढ़ी रफ्तार
इस कानूनी लड़ाई में तेजी आने की एक बड़ी वजह सुप्रीम कोर्ट का वह निर्देश भी है, जो हाल ही में सामने आया था। शीर्ष अदालत ने इसी साल जुलाई में इस मामले से जुड़ी एसएलपी का निपटारा करते हुए झारखंड हाईकोर्ट से अनुरोध किया था कि लालू प्रसाद की अपीलों पर सुनवाई में तेजी लाई जाए और संभव हो तो छह महीने के भीतर इसका निष्पादन किया जाए। बहरहाल, अब सबकी निगाहें 28 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब बचाव पक्ष अपनी दलीलों को आगे बढ़ाएगा।
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