
Jamshedpur : स्क्रैप यानी अनुपयोगी रेलवे सामग्री की बिक्री से कमाई के मामले में दक्षिण पूर्व (एसई) रेलवे ने नया रिकॉर्ड बनाया है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अक्टूबर तक रेलवे ने स्क्रैप बेचकर 403.86 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया है। इसके साथ ही दक्षिण पूर्व रेलवे देश का पहला ऐसा जोनल रेलवे बन गया है, जिसने स्क्रैप बिक्री से 400 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है।
रेलवे की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तीय साल की समान अवधि की तुलना में इस बार स्क्रैप बिक्री से होने वाली आमदनी में 55.37 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, अक्टूबर तक के लिए निर्धारित 240 करोड़ रुपये के लक्ष्य को भी रेलवे ने काफी पीछे छोड़ दिया। वास्तविक कमाई निर्धारित लक्ष्य से 68.28 प्रतिशत ज्यादा रही।
अक्टूबर में 90.43 करोड़ रुपये का स्क्रैप बेचा
इस उपलब्धि में अक्टूबर महीने की अहम भूमिका रही। स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के तहत दक्षिण पूर्व रेलवे ने अक्टूबर में 90.43 करोड़ रुपये मूल्य के स्क्रैप की बिक्री की। जबकि इस महीने के लिए 49 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था। इस तरह रेलवे ने लक्ष्य से कहीं अधिक राजस्व हासिल किया है। अभियान के दौरान किसी भी जोनल रेलवे की तुलना में यह सबसे अधिक स्क्रैप बिक्री रही।
इस अभियान का मुख्य मकसद रेलवे स्टेशनों, डिपो, वर्कशॉप और अन्य परिसरों में लंबे समय से पड़े अनुपयोगी सामान को हटाना है। इससे एक ओर रेलवे को अतिरिक्त आमदनी हो रही है, वहीं दूसरी ओर परिसरों में स्वच्छता और जगह के बेहतर इस्तेमाल का रास्ता भी खुल रहा है।
जीएम अनिल कुमार जैन के नेतृत्व में तेज हुआ अभियान
दक्षिण पूर्व रेलवे की इस उपलब्धि में महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन के मार्गदर्शन और निगरानी में चलाए गए जीरो स्क्रैप मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने सभी विभागों को रेलवे परिसरों में जमा अनुपयोगी सामग्री की पहचान कर समय पर उसका निस्तारण करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद जोन के विभिन्न विभागों और कार्य इकाइयों में स्क्रैप की पहचान, उसकी सूची तैयार करने और बिक्री की प्रक्रिया में तेजी लाई गई। अभियान के नतीजे में अधिकांश इकाइयों ने जीरो स्क्रैप का दर्जा हासिल कर लिया है। चिह्नित स्थानों पर नए स्क्रैप के निस्तारण और उठाव की प्रक्रिया भी पूरी की गई है।
स्टोर्स सहित सभी इकाइयों ने निभाई भूमिका
इस अभियान को सफल बनाने में स्टोर्स विभाग के साथ रेलवे की अन्य इकाइयों ने भी योगदान दिया। पूरे जोन में अभियान चलाकर डिपो, वर्कशॉप, शेड और दूसरे रेलवे परिसरों में पड़े पुराने एवं अनुपयोगी सामान को चिह्नित किया गया। इसके बाद नियमानुसार उनकी बिक्री और हटाने की कार्रवाई की गई।
दक्षिण पूर्व रेलवे की इस उपलब्धि से रेलवे को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला है। साथ ही रेलवे परिसरों को साफ-सुथरा रखने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की दिशा में भी प्रगति हुई है। रेलवे ने आगे भी जीरो स्क्रैप मिशन जारी रखने और स्क्रैप के व्यवस्थित निस्तारण पर जोर देने की बात कही है।

