एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली : अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो आंदोलन की धरती रही झारखंड से जुड़े अलग-अलग क्रांति और विद्रोह के बारे में जानना बेहद जरूरी है। यह जानकारी न सिर्फ आपको प्रतियोगिता में सफलता दिला सकती है बल्कि अपने देश और राज्य की गौरवशाली परंपरा और इतिहास की समझ विकसित करने में मदद कर सकती है। ऐसा ही एक विद्राह है संथाल विद्रोह (Santhal Rebellion)।यह भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी। अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं। इतिहास के जानकारी प्रो. डाॅ. संजय नाथ ने बताया कि 1855 और 1856 के बीच संथाल प्रदेश (Santhal Parganas)में यह विद्रोह हुआ था। इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पूर्ववर्ती घटनाओं में से एक माना जाता है।

संथाल विद्रोह और संथाल हूल में क्या है अंतर
संथाल विद्रोह को संथाल हूल के रूप में जाना जाता है। इसका नेतृत्व आदिवासी समुदाय के युवा कर रहे थे। यह विद्रोह संथाल जनजतियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी, जमींदार और सामंतवादी नीतियों के खिलाफ शुरू किया था। संथाल विद्रोह पूर्वी भारत में हुआ। वर्तमान में यह इलाका झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके के बीच है। भोगनडीह को इस आंदोलन का केंद्र माना जाता है। यह झारखंड के साहिबगंज जिले का एक गांव है। अंग्रेजों द्वारा जनसामान्य के ऊपर किये जा रहे अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ इसकी शुरुआत हुई। संथाल आदिवासियों को अपनी जमीनों की हक के बदले धोखा मिला था। संथाल विद्रोह बंगाल सरकार और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया की राजस्व प्रणाली, जमींदारी और सुदखोरी व्यवस्थाओं के खिलाफ था। इस अांदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें संथाल समाज ने कभी अंग्रेजों के आगे आत्मसमर्पण नहीं किया।
कब शुरू हुआ था संथाल आंदोलन
संथाल विद्रोह की शुरुआत 30 जून 1855 को हुई। इस आंदोलन के मुख्य रूप से दो नायक सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू थे। दोनों सगे भाई थे। इसके अलावा दो और भाई चांद और भैरव तथा दो बहने फूलो और झानो का अहम योगदान रहा। विद्रोह करने वाले वीरों ने ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ लगभग 60 हजार संथाल आदिवासियों को लामबंद किया था। इस आंदोलन के शुरू होते ही सभी संथाल विद्रोहियों ने ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ हथियार उठा लिए। इस दौरान विद्रोहियों ने कई जमींदारों और साहूकारों को मार दिया गय। हालांकि इस बीच ब्रिटिश सरकार द्वारा विद्रोह को दबाने की पूरी कोशिश की गई। लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके विपरीत विद्रोही और भड़क गया। इस विद्रोह से ब्रिटिश हुकुमत को नींव हिल गई ।
कैसे दबाया गया संथाल विद्रोह
ब्रिटिश सरकार ने संथाल विद्रोह को दबाने और सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू को गिरफ्तार करने के लिए बंगाल के मुर्शीदाबाद के नवाब से सहायता मांगी। इसके बाद विद्रोह को दबाने के लिए बड़ी तादात में सैनिक भेजे गए। बढ़ते विद्रोह को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू के गिरफ्तारी पर इनाम की घोषणा की थी। ब्रिटिश हुकुमत के सैनिकों के पास आधुनिक हथियार व गोला बारूद की तुलना में संथालों के पारंपरिक हथियार ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाए। जिसके फलस्वरूप विद्रोही हताहत होने लगे। धीरे -धीरे आंदोलन कमजोर पड़ने लगा। संथाल विद्रोह को दबाने के लिए 7 वीं नेटिव इनफैंट्री, रेजिमेंट और 40 वीं नेटिव इनफैंट्री समेत अन्य सैन्य टुकड़ियों को भेजा गया था।
किन क्षेत्रों में हुई संथाल विद्रोह की निर्णायक लड़ाईयां
संथाल विद्रोह की निर्णायक लड़ाइयां 1855 से 1856 के बीच रघुनाथपुर, कहलगांव, सूरी और मुनकटोरा जैसी स्थानों पर हुई थी। ब्रिटिश हुकुमत और संथालियों के बीच लड़ाई में लगभग 15 हजार से अधिक विद्रोही मारे गए। इसके साथ ही सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू भी लड़ाई में मारे गए। देश के लिए वीरों ने कुर्बानियां दी लेकिन किसी ने अंग्रेजों के सामने हथियार नहीं डाले।
कौन ने संथाल विद्रोह सिद्धू और कान्हू
सिद्धू और कान्हू वीर के रूप में संथाल जातियों में मशहूर थे। दोनों भाईयों ने विद्रोह की शुरुआत बंगाल सरकार और अंग्रेजों के दमन के खिलाफ शुरू किया था। बंगाल सरकार की भूमिगत नीति जो संथाल आदिवासियों के खिलाफ था। इस नीति के तहत संथाली सरकारी जमीन का उपयोग नहीं कर सकते थे। जिसके खिलाफ में संथाल आदिवासियों में धीरे धीरे रोष बढ़ने लगा। अंतः यह बड़े विद्रोह के रूप में उभर गया। संथाल आदिवासियों ने बंगाल सरकार के नियंत्रण के कई क्षेत्रों पर हमला किया था। उन्होंने तारापीठ, बीरभूम, पाकुड़, गोड्डा, रांची और दूसरे क्षेत्रों में अपना दबदबा स्थापित किया था।
प्रतियोगी परीक्षाओं में संथाल विद्रोह से पूछे जाते है प्रश्न
झारखंड के प्रतियोगी परीक्षाओं में हर साल संथाल विद्रोह से प्रश्न किए जाते है। भारत के इतिहास में संथाल विद्रोह का बहुत बड़ी घटना है। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विद्रोह से जुड़े विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते है। ये कुछ प्रमुख प्रश्न हैं जो संथाल विद्रोह से संबंधित प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते है। इसके अलावा भी अन्य प्रश्न भी जैसे कि संथाल आदिवासियों की संघर्ष की उपलब्धियाँ, संथाल विद्रोह का प्रभाव आदि पूछे जाते है।
-संथाल विद्रोह कब और क्यों हुआ?
उत्तर : यह आंदोलन 1855 में शुरू हुआ। वर्ष 1856 तक चला। यह आंदोलन अंग्रेज सरकार के भूमिगत नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ।
-संथाल विद्रोह का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर : संथाल विद्रोह बंगाल सरकार और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया की राजस्व प्रणाली, जमींदारी और सुदखोरी व्यवस्थाओं के खिलाफ
-संथाल विद्रोह के नेतृत्व में कौन-कौन से नेता थे?
उत्तर : विद्रोह का नेतृत्व चार मूर्मू भाइयों – सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव तथा दो जुड़वां मूर्मू बहनें फूलो और झानो ने किया।
-संथाल विद्रोह का प्रभाव किस क्षेत्र पर था?
उत्तर :संथाल विद्रोह पूर्वी भारत में हुआ। वर्तमान में यह इलाका झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके के बीच है
-संथाल विद्रोह के दौरान कौन-कौन से स्थानों पर हमला हुआ?
उत्तर :भोगनडीह को इस आंदोलन का केंद्र माना जाता है। यह झारखंड के साहिबगंज जिले का एक गांव है।संथाल आदिवासियों ने बंगाल सरकार के नियंत्रण के कई क्षेत्रों पर हमला किया था। उन्होंने तारापीठ, बीरभूम, पाकुड़, गोड्डा, रांची और दूसरे क्षेत्रों में अपना दबदबा स्थापित किया था। निर्णायक लड़ाइयां 1855 से 1856 के बीच रघुनाथपुर, कहलगांव, सूरी और मुनकटोरा जैसी स्थानों पर हुई थीं।
-संथाल विद्रोह के पश्चात सरकार कैसे ने उसे दबाया और दमन किया?
उत्तर :ब्रिटिश सरकार ने संथाल विद्रोह को दबाने और सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू को गिरफ्तार करने के लिए बंगाल के मुर्शीदाबाद के नवाब से सहायता मांगी। इसके बाद विद्रोह को दबाने के लिए बड़ी तादात में सैनिक भेजे गए।

