- जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की घटना से सीख लेने की सलाह…
Ranchi (Jharkhand): भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के सबसे बड़े अस्पताल, राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), रांची की मौजूदा स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि राज्य सरकार पहले रिम्स की खस्ताहालत को सुधारे, उसके बाद ही किसी नए रिम्स के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए।
रिम्स की जर्जर इमारत दुर्घटनाओं का आमंत्रण
शनिवार को बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि रिम्स की जर्जर इमारतें लगातार दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं। दीवारों से गिरता प्लास्टर, दरारें और जगह-जगह जमा पानी न केवल इलाज करा रहे मरीजों के लिए खतरनाक है, बल्कि वहां काम कर रहे डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की जान को भी खतरे में डाल रहा है।
एमजीएम अस्पताल की घटना से नहीं लिया सबक
बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने उससे भी कोई सबक नहीं लिया है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय सचिव ने रिम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को राजनीति और भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है।
मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पुरजोर अपील की है कि वे रिम्स की बदतर स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाएं। उन्होंने आगे कहा कि रिम्स की जर्जर दीवारें वर्तमान हेमंत सरकार की नाकामी की जीती-जागती गवाह हैं। हर गिरती हुई ईंट और टपकती हुई छत मुख्यमंत्री हेमंत सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार का स्पष्ट प्रमाण है। बाबूलाल मरांडी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई प्रयास कर रही है।

