
पटना: बिहार में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक नया कदम उठाया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की उपस्थिति के साथ-साथ छात्रों की उपस्थिति भी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इस फैसले को लागू करने के लिए बिहार शिक्षा विभाग ने एक नया फरमान जारी किया है, जो शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल को जन्म देगा।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत 6 जिलों में शुरुआत
इस योजना को पहले बिहार के 6 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। जिन जिलों में यह शुरुआत की जाएगी, वे हैं पटना, नालंदा, वैशाली, जहानाबाद, सारण और भोजपुर। इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे पूरे राज्य में लागू करने पर विचार किया जाएगा। बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस आदेश के संदर्भ में निर्देश जारी किए हैं।
कक्षा 3 से होगा शुरुआत
इस नई व्यवस्था के तहत कक्षा 3 के विद्यार्थियों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इसके लिए संबंधित स्कूलों को टैबलेट मुहैया कराए जाएंगे, जिनके जरिए छात्र-छात्राओं की उपस्थिति और उनकी परीक्षा के परिणाम ऑनलाइन ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
कक्षा 3 के बच्चों की उपस्थिति पर जोर
इस योजना में कक्षा 3 के छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत प्रत्येक स्कूल को यह निर्देश दिया जाएगा कि वह हर कक्षा की फोटो भी पोर्टल पर अपलोड करें। साथ ही, महीने के अंत में विद्यालयों को उस महीने में पढ़ाए गए पाठ्यक्रम का विवरण भी ऑनलाइन अपडेट करना होगा।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित स्कूल
यह पायलट प्रोजेक्ट पांच सरकारी स्कूलों में लागू होगा, जिसमें तीन मध्य विद्यालय और दो प्राथमिक विद्यालय शामिल होंगे। इन विद्यालयों को बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा चुना जाएगा।
10 फरवरी से होगी शुरुआत
इस योजना की शुरुआत 10 फरवरी 2025 से होने जा रही है। चयनित विद्यालयों में कक्षा 3 के बच्चों की परीक्षा के परिणाम शिक्षक टैबलेट के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इसके अलावा, प्रत्येक महीने के अंत में पाठ्यक्रम का विवरण भी अपडेट किया जाएगा, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके।
शिक्षा में सुधार का नया प्रयास
बिहार शिक्षा विभाग की यह नई पहल छात्रों की उपस्थिति और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर डालेगी। यह कदम यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि सभी विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहें, और उनकी पढ़ाई का कोई हिस्सा छूटने न पाए। विभाग इस प्रणाली के सफल होने पर इसे पूरे राज्य में लागू करने पर विचार करेगा।
इस कदम से ना केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि स्कूलों की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता आएगी। इसके अलावा, राज्य सरकार को बच्चों की उपस्थिति और उनकी पढ़ाई से संबंधित डेटा को आसानी से ट्रैक करने में मदद मिलेगी।

