
रांची : झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल पहुंचाने का काम अब भी अधूरा है। राज्य में करीब 55.9 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक ही नल जल कनेक्शन पहुंचा है। वहीं, कई जलापूर्ति योजनाओं में काम की धीमी गति और लापरवाही के मामले सामने आये हैं। इसे देखते हुए पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने गंभीर लापरवाही बरतने वाले संवेदकों को ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया है। योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जल जीवन मिशन के तहत लातेहार, गढ़वा, पलामू, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में संचालित योजनाओं की समीक्षा के दौरान प्रगति और काम की गुणवत्ता से जुड़े मामलों पर ध्यान दिया गया। जिन योजनाओं में काम धीमा है या अनियमितता की शिकायत मिली है, उनकी जांच कराने का निर्देश दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कार्यपालक अभियंता और संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
सिमडेगा में 93%, लातेहार में 73% परिवारों तक कनेक्शन
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, फरवरी 2026 तक सिमडेगा में करीब 93 प्रतिशत, लोहरदगा में 77 प्रतिशत और लातेहार में 73 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक नल जल कनेक्शन पहुंचा था। इसके विपरीत पाकुड़ में करीब 13 प्रतिशत, गोड्डा में 19 प्रतिशत और जामताड़ा में 37 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक ही कनेक्शन पहुंचा था। ये आंकड़े जिलों में नल जल कनेक्शन के कवरेज में अंतर दिखाते हैं। हालांकि, ये फरवरी 2026 के आंकड़े हैं और अक्टूबर की अद्यतन स्थिति नहीं बताते।
रांची में भी कनेक्शन का काम बाकी
रांची पश्चिम के ग्रामीण क्षेत्र में जून 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 2.69 लाख परिवारों में से 1.60 लाख परिवारों को नल जल कनेक्शन मिला था। उस समय कवरेज लगभग 59.4 प्रतिशत था। रांची जिले में वर्तमान में कितने परिवारों तक कनेक्शन पहुंचा है, इसकी अद्यतन जिला-वार जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सचिव ने नियमित जलापूर्ति पर दिया जोर
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने सभी पात्र ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल पहुंचाने को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। पूर्ण हो चुकी योजनाओं की नियमित निगरानी करने को भी कहा गया है, ताकि घरों तक वास्तव में पानी पहुंचता रहे।
जल जीवन मिशन के तहत केवल नल कनेक्शन देना ही नहीं, बल्कि नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसके लिए लंबित योजनाओं को समय पर पूरा करने, निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी करने और जहां जलापूर्ति बाधित है, वहां व्यवस्था दुरुस्त करने पर जोर दिया गया है।

