
जमशेदपुर : ऑनलाइन सामान की घर तक आपूर्ति करने वाले कर्मचारियों के सामने कम कमाई और काम से जुड़ी सुविधाओं की कमी का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। जमशेदपुर में ब्लिंकिट के डिलीवरी कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर नाराजगी जाहिर की है। आज बिरसानगर के गुड़िया मैदान में करीब 60 से 70 युवा एकत्र हुए। उसके बाद उन लोगों ने मजदूरी, ऑर्डर की उपलब्धता तथा सुरक्षा सुविधाओं से जुड़ी अपनी मांगें उठाईं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक काम करने और लगातार मेहनत करने के बावजूद उनकी आमदनी पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण उनको परिवार चलाने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों का क्या है आरोप
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि काम के अनुपात में भुगतान नहीं मिल रहा है। इसके अलावा बीमा, सुरक्षा कार्ड और नौकरी से संबंधित लिखित दस्तावेज जैसी सुविधाओं की कमी भी उनकी चिंता का विषय है। कर्मचारियों के मुताबिक, डिलीवरी के दौरान उन्हें अलग-अलग तरह की परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, लेकिन उनकी सुरक्षा और रोजगार से जुड़ी जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ब्लिंकिट डिलीवरी कर्मचारियों की मांग, काम के अनुरूप मिले भुगतान
बिरसानगर के गुड़िया मैदान में जुटे डिलीवरी कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से घरों तक सामान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी मजदूरी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। उनका कहना है कि दिनभर काम करने के बाद भी होने वाली कमाई परिवार की जरूरतों के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन से भुगतान व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। उनका कहना है कि काम के घंटों, मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुसार उचित आमदनी मिलनी चाहिए। डिलीवरी का काम करने वाले युवाओं के लिए कमाई ही परिवार के भरण-पोषण का प्रमुख आधार है। ऐसे में भुगतान कम होने से उनके सामने आर्थिक परेशानी बढ़ रही है।
प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने यह भी कहा कि वे काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन मेहनत के बदले सम्मानजनक कमाई और जरूरी सुविधाएं मिलना आवश्यक है। उनके अनुसार, यदि कंपनी उनकी मांगों पर ध्यान देती है, तो कर्मचारियों को काम जारी रखने में राहत मिलेगी।
एक घंटे की कमाई 80-90 रुपये से घटकर 40-50 रुपये होने का दावा
डिलीवरी कर्मचारियों ने ऑर्डर की संख्या में कमी और भुगतान घटने को अपनी प्रमुख समस्याओं में शामिल किया। उनका दावा है कि पहले एक घंटे में 80 से 90 रुपये तक की कमाई हो जाती थी, लेकिन अब कई बार यह घटकर 40 से 50 रुपये प्रति घंटे रह गई है। कर्मचारियों के मुताबिक, ऑर्डर कम मिलने के कारण काम के लिए उपलब्ध रहने के बावजूद पर्याप्त आमदनी नहीं हो पा रही है।
उनका कहना है कि डिलीवरी कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से पुराने वर्करों को पहले की तुलना में कम ऑर्डर मिल रहे हैं। कई बार उन्हें लंबे समय तक ऑर्डर का इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान काम के लिए समय देने के बावजूद उनकी कमाई नहीं बढ़ती। कर्मचारियों ने इसी स्थिति को लेकर नाराजगी जताई और भुगतान व्यवस्था में सुधार की मांग की। हालांकि, प्रति घंटे की कमाई से जुड़े ये आंकड़े कर्मचारियों की ओर से बताए गए हैं। कंपनी की ओर से इन दावों की पुष्टि या भुगतान व्यवस्था पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
बीमा, सुरक्षा कार्ड और नौकरी के लिखित दस्तावेज की मांग
डिलीवरी कर्मचारियों ने केवल कम कमाई ही नहीं, बल्कि रोजगार से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि उन्हें पर्याप्त वेतन के साथ बीमा, सुरक्षा कार्ड और नौकरी से संबंधित लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, घरों तक सामान पहुंचाने के दौरान उन्हें लगातार काम करना पड़ता है और विभिन्न जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बीमा तथा सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना है कि कंपनी को कर्मचारियों की सुरक्षा और रोजगार संबंधी जरूरतों को गंभीरता से लेना चाहिए।
डिलीवरी के काम में लगे युवाओं ने प्रबंधन से मांग की कि उन्हें जरूरी दस्तावेज और सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि कर्मचारियों को अपनी कमाई और काम से जुड़ी शर्तों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

