Home » Jharkhand High Court : झारखंड में थानों और चौक-चौराहों पर सीसीटीवी की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, गृह सचिव और डीजीपी से मांगा जवाब

Jharkhand High Court : झारखंड में थानों और चौक-चौराहों पर सीसीटीवी की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, गृह सचिव और डीजीपी से मांगा जवाब

कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में कानून के प्रति डर के लिए सीसीटीवी कैमरों का पूरी तरह काम करना जरूरी- हाईकोर्ट

by Rakesh Pandey
Jharkhand High Court, Lokayukta Appointment, Information Commission Jharkhand, Chief Information Commissioner, Selection Committee Meeting, Jharkhand News, Constitutional Posts Vacancy, PIL Jharkhand, Rajiv Ranjan Advocate General, Rajkumar Petition
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : पुलिस थानों में हिरासत के दौरान होने वाली घटनाओं की निगरानी से लेकर सड़क दुर्घटनाओं में शामिल वाहनों की पहचान तक, सीसीटीवी कैमरों की भूमिका अहम है। इसके बावजूद झारखंड में कई थानों और सार्वजनिक स्थलों पर कैमरे नहीं लगाए जाने या उनके चालू होने की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। डोरंडा थाने में एक नाबालिग के साथ मारपीट के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य में सीसीटीवी व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। साथ ही पुलिस थानों में कैमरे लगाने के लिए स्पष्ट समय-सीमा पेश करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में भय पैदा करने के लिए सीसीटीवी कैमरों का पूरी तरह काम करना जरूरी है। यदि थानों और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी की व्यवस्था प्रभावी नहीं होगी, तो अपराध से जुड़े मामलों की जांच और घटनाओं की पड़ताल में कठिनाई आ सकती है। इस मामले में अदालत ने रांची के थानों में कैमरों की उपलब्धता के साथ-साथ शहर के चौक-चौराहों पर लगे कैमरों की मौजूदा स्थिति की जानकारी भी मांगी है।

रांची के 54 थानों में से केवल 22 में सीसीटीवी कैमरे

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश जानकारी के अनुसार, रांची जिले में कुल 164 सीसीटीवी उपकरण लगाए गए हैं। शहरी क्षेत्र के 25 पुलिस थानों में से 17 में कैमरे लगाए जा चुके हैं। इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्र के 29 थानों में से केवल पांच थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की जानकारी दी गई। इन आंकड़ों के अनुसार, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 54 थानों में से 22 में कैमरे लगाए गए हैं। यानी उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 32 थानों में कैमरे लगाए जाने की जरूरत बाकी है। यह स्थिति पुलिस थानों में निगरानी व्यवस्था के विस्तार को लेकर सवाल खड़े करती है।

रांची के पंडरा ओपी, हिंदपीढ़ी थाना, विधानसभा थाना और एयरपोर्ट थाना समेत कई महत्वपूर्ण पुलिस इकाइयों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अदालत ने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है।

थानों में सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी केवल पुलिसकर्मियों की गतिविधियों पर निगरानी तक सीमित नहीं है। इनका इस्तेमाल थाने में आने-जाने वाले लोगों, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और हिरासत से संबंधित घटनाओं की पड़ताल में भी महत्वपूर्ण हो सकता है। कैमरे नहीं होने या उनके काम नहीं करने की स्थिति में किसी घटना के बाद उपलब्ध दृश्य साक्ष्यों की कमी जांच को प्रभावित कर सकती है।

सड़क दुर्घटनाओं और अपराधों की जांच पर हाईकोर्ट की चिंता

अदालत ने सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों की उपयोगिता पर भी जोर दिया। सड़क दुर्घटना होने के बाद यदि घटनास्थल का दृश्य उपलब्ध नहीं होता है, तो दुर्घटना में शामिल वाहन की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। इसी तरह, किसी आपराधिक घटना के बाद संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाने में भी कैमरों से मिलने वाले दृश्य साक्ष्य मददगार साबित हो सकते हैं।

हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब निगरानी व्यवस्था ही कमजोर होगी, तो राज्य में कानून-व्यवस्था को प्रभावी ढंग से बनाए रखना कैसे संभव होगा। अदालत की टिप्पणी का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि सीसीटीवी कैमरे केवल लगाए ही नहीं जाने चाहिए, बल्कि उनका चालू और उपयोगी स्थिति में रहना भी जरूरी है।

शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे कैमरों की स्थिति को लेकर भी अदालत ने जानकारी मांगी है। कई बार कैमरे लगाए जाने के बावजूद उनके चालू होने, तकनीकी खराबी या निगरानी व्यवस्था की नियमित जांच से संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं होती। ऐसे में अदालत ने वर्तमान स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि यह पता चल सके कि सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी व्यवस्था वास्तव में काम कर रही है या नहीं।

गृह सचिव, डीजीपी और एसएसपी को समय-सीमा बताने का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वे थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए स्पष्ट समय-सीमा बताएं। अदालत यह जानना चाहती है कि जिन थानों में अब तक कैमरे नहीं लगाए गए हैं, वहां यह व्यवस्था कब तक पूरी की जाएगी।

इसके साथ ही अधिकारियों को रांची के विभिन्न चौक-चौराहों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों की मौजूदा स्थिति की जानकारी भी देनी होगी। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि लगाए गए कैमरे चालू हैं या नहीं। इस जानकारी के आधार पर सार्वजनिक स्थानों की निगरानी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।

अदालत के निर्देश के बाद अब संबंधित अधिकारियों को कैमरे लगाने की योजना, निर्धारित समय-सीमा और मौजूदा उपकरणों की कार्यशील स्थिति के बारे में जवाब देना होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कैमरे लगाने की कोई अंतिम तारीख तय होने का उल्लेख नहीं है। अदालत ने अधिकारियों से समय-सीमा मांगी है, जिसे अगली सुनवाई में पेश किया जाना है।

30 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

डोरंडा थाने में नाबालिग के साथ मारपीट के मामले की सुनवाई के दौरान उठा सीसीटीवी का मुद्दा अब पुलिस थानों और सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी व्यवस्था तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। उस दिन अधिकारियों की ओर से सीसीटीवी कैमरे लगाने की समय-सीमा और रांची के प्रमुख चौक-चौराहों पर मौजूद कैमरों की स्थिति के संबंध में जानकारी दी जानी है। अदालत के निर्देश के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि पुलिस थानों में कैमरे लगाने और सार्वजनिक निगरानी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए क्या समय-सीमा प्रस्तुत की जाती है।

Read ALos- Giridih News : गिरिडीह में मनोज तिवारी का राहुल गांधी पर तीखा हमला, बोले- दिल्ली में अब प्रदर्शन नहीं, देश पर अटैक हो रहा है

Related Articles

Leave a Comment