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Devshayani Ekadashi 2026 : देवशयनी एकादशी कल, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत पारण समय, पूजा विधि और तुलसी पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यतानुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होता है, जिसके दौरान विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है

by Rakesh Pandey
Devshayani Ekadashi 2026
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जमशेदपुर : देवशयनी एकादशी सनातन धर्म की प्रमुख एकादशी तिथियों में से एक मानी जाती है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होता है, जिसके दौरान विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी माता की विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि, वैभव और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

देवशयनी एकादशी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे होगा। एकादशी तिथि का समापन 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत और पूजा 25 जुलाई 2026, शनिवार को की जाएगी।

देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

धार्मिक कार्यों के लिए प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:32 बजे से 05:16 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:06 बजे से 12:58 बजे तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 02:43 बजे से 03:35 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:04 बजे से 07:26 बजे तक
अमृत काल : सुबह 11:11 बजे से दोपहर 12:59 बजे तक

देवशयनी एकादशी व्रत पारण का समय

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी व्रत का पारण 26 जुलाई को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 05:39 बजे से 08:22 बजे तक रहेगा।

देवशयनी एकादशी पूजा विधि

देवशयनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ अथवा पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।

पूजा की चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को पीले पुष्प, अक्षत, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। देसी घी का दीपक जलाकर विधिपूर्वक पूजा करें। इसके बाद विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम अथवा भगवान विष्णु के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। अंत में फल, मिठाई और सात्विक भोग अर्पित कर प्रसाद वितरित करें।

देवशयनी एकादशी पर तुलसी पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी माता को माता लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है। इसलिए देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी की पूजा का विशेष महत्व है।

श्रद्धालु इस दिन तुलसी के पौधे में गंगाजल मिश्रित जल अर्पित करते हैं, घी का दीपक जलाते हैं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक तुलसी पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है तथा घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और श्रद्धालु भक्ति, साधना, दान-पुण्य तथा धार्मिक अनुष्ठानों पर विशेष ध्यान देते हैं। इस दिन किया गया व्रत और पूजा आध्यात्मिक उन्नति तथा पुण्य फल प्रदान करने वाला माना गया है।

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