
रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के सदस्य जमाल अहमद को पद से हटाने और उनकी कथित आय से अधिक संपत्ति की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है। शुक्रवार को उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर बताया है कि जेपीएससी के सदस्य जमाल अहमद ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पद का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर चल और अचल संपत्तियां अर्जित की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रांची में उनके पास 3000 से 4000 वर्गफुट का एक आलीशान फ्लैट है और वे एक अन्य बड़े फ्लैट की भी तलाश कर रहे हैं। हजारीबाग जिले में भी उनके नाम अथवा कथित तौर पर बेनामी संपत्तियां अर्जित किए जाने का आरोप उन्होंने लगाया है।
जेपीएससी की गरिमा बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी
मरांडी ने कहा है कि जमाल अहमद की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, विभिन्न निवेशों तथा आय के ज्ञात और अज्ञात स्रोतों की अविलंब एसीबी से जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच की निष्पक्षता और जेपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए उन्हें तत्काल पदमुक्त किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे व्यक्ति को जेपीएससी जैसी संस्था में जिम्मेदारी दी जाएगी तो आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगेंगे तथा राज्य के लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास प्रभावित होगा।
प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे जमाल
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि जमाल अहमद पहले प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। वर्ष 2008 में उनकी नियुक्ति लेक्चरर के पद पर हुई थी। उन्होंने दावा किया कि उस नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कर रही है। मरांडी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति प्रक्रिया ही जांच के दायरे में हो, तो उसे जेपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था का सदस्य नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।
मरांडी ने अपने आरोप में एक और खुलासा किया है। कहा है कि राज्य सरकार ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के दबाव में नियमों की अनदेखी कर जमाल अहमद को जेपीएससी का सदस्य नियुक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या किसी विवादित व्यक्ति की सिफारिश पर दूसरे विवादित व्यक्ति को संवैधानिक पद सौंपना सरकार की कार्यशैली का हिस्सा है।

