
धनबाद : कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (सीएमपीएफओ) धनबाद में करीब 3.64 करोड़ रुपये के पेंशन फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। संस्थान के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) की शिकायत पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की धनबाद इकाई ने चार कर्मचारियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में सीएमपीएफओ के सेक्शन ऑफिसर अचिंत्य कुमार, दीप कुमार और अजय कुमार सिन्हा के अलावा वरिष्ठ सामाजिक सुरक्षा सहायक मंजीत कुमार को नामजद किया गया है।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि आरोपित कर्मचारियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर विभागीय नियमों को दरकिनार करते हुए फर्जी पेंशन क्लेम तैयार कर उनका भुगतान कराया।
सात महीने में 142 फर्जी क्लेम का आरोप
सीवीओ की ओर से सीबीआई को दी गई शिकायत के अनुसार, मार्च 2016 से सितंबर 2016 के बीच कुल 142 पेंशन क्लेम कथित तौर पर गलत तरीके से प्रोसेस किए गए। उस समय संबंधित कर्मचारी डीलिंग असिस्टेंट के रूप में कार्य कर रहे थे। आरोप है कि पेंशन क्लेम से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर की गई और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
इन कथित फर्जी क्लेम के आधार पर मासिक पेंशन के साथ पेंशन एरियर का भी भुगतान किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी खजाने से कुल 3,64,48,052 रुपये का गलत भुगतान होने का आरोप है।
धनबाद और ओडिशा में पदस्थापित हैं आरोपित
मामले में नामजद सेक्शन ऑफिसर दीप कुमार वर्तमान में ओडिशा के तालचेर रीजनल ऑफिस में पदस्थापित हैं। वहीं, अचिंत्य कुमार, अजय कुमार सिन्हा और वरिष्ठ सामाजिक सुरक्षा सहायक मंजीत कुमार धनबाद में कार्यरत बताए गए हैं।
धोखाधड़ी से लेकर आपराधिक साजिश तक के आरोप
सीबीआई ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपों में धोखाधड़ी, बेईमानी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल, आपराधिक साजिश और सरकारी पद का दुरुपयोग शामिल है।
प्राथमिकी में बीएनएस की धारा 318 धोखाधड़ी और बेईमानी, धारा 338 मूल्यवान सुरक्षा अथवा जाली दस्तावेज तैयार करने, धारा 336 धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी और धारा 340 जाली दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को वास्तविक बताकर इस्तेमाल करने से संबंधित है।
इसके अलावा बीएनएस की धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ए) के तहत पद का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ हासिल करने तथा धारा 13(2) के तहत आपराधिक कदाचार के लिए सजा से संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी पेंशन क्लेम किस प्रक्रिया से तैयार और स्वीकृत किए गए, इसमें कितने लोग शामिल थे और 3.64 करोड़ रुपये के कथित भुगतान का वास्तविक लाभ किन लोगों को मिला।

