
रांची : झारखंड में संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी सीजीएल परीक्षा के आधार पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों को न्यायालय के आदेश के बाद दोबारा काम पर तो रख लिया गया है, लेकिन वेतन भुगतान को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हुई है। परीक्षा परिणाम रद्द किए जाने के बाद उत्पन्न प्रशासनिक उलझन के कारण विभिन्न विभागों में असमंजस बना हुआ है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है।
काम पर वापसी हुई, वेतन का इंतजार जारी
राज्य सरकार ने सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद परीक्षा परिणाम रद्द करने की बात कही थी। इसके बाद एक साथ नियुक्त कर्मचारियों को वापस लेने का निर्णय किया गया था। हालांकि बाद में न्यायालय के निर्देश पर उन्हें दोबारा सेवा में रख लिया गया। कर्मचारी अपने-अपने विभागों में काम कर रहे हैं, लेकिन वेतन जारी करने की प्रक्रिया अटकी हुई है।
बताया जा रहा है कि पिछले महीने भी इन कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला था। चालू महीने में भी भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश सामने नहीं आने से कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है। श्रम विभाग सहित कुछ अन्य विभागों ने वेतन भुगतान के संबंध में वित्त विभाग से मार्गदर्शन मांगा है।
पुराना आदेश वापस होने के बाद ही भुगतान संभव
संबंधित विभागों का कहना है कि कर्मचारियों को सेवा में वापस लेने के साथ कार्मिक विभाग को पूर्व में जारी आदेश वापस लेना होगा। आदेश निरस्त होने के बाद ही वेतन भुगतान की प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद नोटिस जारी किया था। परिणाम रद्द करने की घोषणा के साथ कर्मचारियों को कार्यमुक्त भी किया गया था। न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें पुनः काम पर रख लिया गया, लेकिन पुराने प्रशासनिक आदेश के कारण भुगतान में तकनीकी बाधा बनी हुई है।
कार्य आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू
इस बीच कार्मिक विभाग ने कर्मचारियों को दोबारा कार्य आवंटित करने की तैयारी तेज कर दी है। संबंधित शाखाओं से कार्य आवंटन का प्रस्ताव मंगाया जा रहा है। संचिका पर स्वीकृति मिलते ही सफल अभ्यर्थियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी। संकेत हैं कि फिलहाल कर्मचारियों से पहले निर्धारित कार्य ही कराए जा सकते हैं।
इन पदों के कर्मचारियों पर असर
वेतन संबंधी असमंजस से कुल 2017 कर्मचारी प्रभावित बताए जा रहे हैं। इनमें 195 प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, 252 प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, 185 अंचल निरीक्षक सह कानूनगो, 863 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, 335 कनीय सचिवालय सहायक, 182 श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और पांच प्लानिंग असिस्टेंट शामिल हैं। अब कर्मचारियों की निगाह कार्मिक और वित्त विभाग के अगले निर्णय पर टिकी है। संबंधित आदेश वापस होने और भुगतान की अनुमति मिलने के बाद ही उनके लंबित वेतन का रास्ता साफ हो पाएगा।

