
रांची : झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग अब और तेज हो गई है। देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में निकली व्यवस्था सुधार यात्रा अब राजधानी रांची आ चुकी है। यह यात्रा 24 अगस्त को नेमरा से शुरू हुई थी। छात्रों ने राज्य के सभी 24 जिलों का चक्कर लगाया है। रांची पहुंचने पर यात्रा समाप्त तो हो गई है, लेकिन छात्रों ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। उनका कहना है कि जब तक रद्द हुई परीक्षाओं पर अदालत का पक्का फैसला नहीं आ जाता, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।
राजधानी में निकाली गई समापन रैली
सभी जिलों का भ्रमण करने के बाद छात्र रांची पहुंचे। यहां बापू वाटिका से लेकर अलबर्ट एक्का चौक तक बड़ी रैली निकाली गई। इसके बाद रैली बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर जाकर खत्म हुई। छात्रों को पूरे रास्ते आम लोगों का भारी समर्थन मिला। युवाओं और अभिभावकों ने उनका हौसला बढ़ाया।
बस नहीं, हमारे लिए ‘रथ’ है यह गाड़ी
सफर के दौरान छात्रों का लगाव अपनी बस से बहुत गहरा हो गया। एक छात्र ने रोते हुए कहा कि यह सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि उनका रथ है। सफर के दौरान बस कई बार घने जंगलों में खराब हुई। इसके बावजूद छात्रों ने अपनी हिम्मत नहीं हारी। गांव के लोगों ने छात्रों के रहने और खाने का इंतजाम किया।
नंगे पांव चलने का लिया कड़ा संकल्प
यात्रा में शामिल कई छात्र बिना चप्पल और जूते के पैदल चले। छात्रों ने बताया कि यह उनके विरोध का एक तरीका है। उन्होंने कसम खाई है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, वे जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे। कठिनाइयों के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ है।
ताने सहे, लेकिन नहीं मानी हार
इस लंबी यात्रा में तीन छात्राएं भी लगातार साथ रहीं। एक छात्रा ने बताया कि राह बिल्कुल आसान नहीं थी। सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके फोटो और वीडियो देखकर बुरे कमेंट्स किए। उन्हें बहुत ट्रोल किया गया। इसके बावजूद वे पीछे नहीं हटीं। उनका कहना है कि यह लड़ाई युवाओं के भविष्य को बचाने की है।
भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता की मांग
छात्रों ने परीक्षा कराने वाली संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि राज्य में नौकरियों की परीक्षा में बड़ा धांधली का खेल चल रहा है। सालों तक मेहनत करने वाले युवाओं का हक मारा जा रहा है। छात्रों ने साफ किया कि उनकी लड़ाई किसी नेता या इंसान से नहीं है। वे केवल पारदर्शी व्यवस्था और न्याय चाहते हैं।
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