
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में धंधली और फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी खबर आई है। आयोग की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता की जमानत अर्जी पर अदालत में बहस पूरी हो गई है। रांची के अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
22 जुलाई से हैं जेल में
अब सभी की निगाहें कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं। इस मामले की जांच कर रही सीआईडी ने 22 जुलाई को श्वेता कुमारी गुप्ता को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। जांच एजेंसी उनसे लगातार पूछताछ कर रही है। सीआईडी यह जानने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा में अनियमितता कराने में उनकी क्या भूमिका थी। जांच में यह बात भी सामने आई है कि दूसरे विभाग में तबादला होने के बाद भी वह जेपीएससी में ही काम कर रही थीं। पुलिस इस बिंदु पर भी गंभीरता से पड़ताल कर रही है।
कार्रवाई का बढ़ा दायरा, कई बड़े चेहरे गिरफ्त में
14वीं जेपीएससी फर्जीवाड़ा मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सीआईडी इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने में जुटी है। इस मामले में अब तक पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते समेत दो दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीआईडी आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि पूछताछ में परीक्षा धांधली से जुड़े कई बड़े और अहम सबूत मिले हैं।
मामले की शुरुआत 21 जुलाई से हुई थी। रांची पुलिस और सीआईडी की टीम ने जेपीएससी दफ्तर में अचानक छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ परीक्षा से जुड़े कई अहम दस्तावेज और जरूरी सामान लगे थे। इसके बाद से ही इस मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है।

