
आय बढ़ाने के साथ स्थानीय व्यंजनों को भी नई पहचान दिलाने की मिलेगी सुविधा
रांची : ग्रामीण महिलाओं को सिर्फ सखी मंडल तक सीमित रखने के बजाय उनके हुनर और उत्पादों को बाजार से जोड़ना जरूरी है। पलाश दीदी कैफे महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका और नियमित आय का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह बातें ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने शुक्रवार को रक्षाशक्ति विश्वविद्यालय परिसर में पलाश दीदी कैफे के उद्घाटन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि कैफे केवल भोजन उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने का जरिया है। झारखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को बाजार से जोड़कर महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय व्यंजनों को भी नई पहचान दी जा सकती है। उन्होंने कैफे संचालित करने वाली सखी मंडल की दीदियों से बातचीत कर संचालन और भोजन तैयार करने से जुड़ी जानकारी ली।
मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि सखी मंडल की महिलाएं योजनाओं की लाभार्थी बनने के बजाय अपने हुनर के दम पर उद्यम खड़ा करें और आत्मनिर्भर बनें।
रक्षाशक्ति विश्वविद्यालय में शुरू कैफे का संचालन मांडर प्रखंड के ब्राम्बे स्थित सरना सखी मंडल की करीब 10 महिलाएं करेंगी। यहां मडुआ पिठा, धुस्का, चिल्का, दाल पिठा, मडुआ चिल्का, दुम्बू और गुलगुला जैसे पारंपरिक व्यंजनों के अलावा चिकन, पनीर, रोल, चाउमिन, बर्गर, सैंडविच, फ्रेंच फ्राइज, सूप और मोजिटो भी उपलब्ध होंगे।
कैफे के उद्घाटन कार्यक्रम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अतिरिक्त सचिव अंजली यादव, जेएसएलपीएस के सीईओ अनन्य मित्तल, झारखंड रक्षाशक्ति विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. हेमेन्द्र कुमार भगत, जेएसएलपीएस के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक-नॉन फार्म नीतीश कुमार सिन्हा, असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. नागेश कुमार और सेक्शन ऑफिसर आरपी साहनी समेत जेएसएलपीएस के राज्य व जिला स्तर के कर्मी और सखी मंडल की महिलाएं मौजूद थीं। कैफे शुरू होने से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और कर्मचारियों को किफायती दर पर भोजन मिलेगा, वहीं ग्रामीण महिलाओं को अपने उद्यम के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध होगा।

