
रांची: पैसों के दम पर अफसर बनने का सपना देख रहे जालसाजों पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा CGL 2023 में रिश्वत देकर पास होने वाले चार अभ्यर्थियों को सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी को पुख्ता सबूत मिले हैं कि इन अभ्यर्थियों ने दलालों को मोटी रकम देकर लीक प्रश्न पत्र हासिल किए और उत्तर रटकर परीक्षा पास की थी। अब सीआईडी इन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है, जिससे इस बड़े रैकेट के कई और राज खुलने की उम्मीद है।
धनबाद, बोकारो और बिहार से जुड़े हैं तार
सीआईडी की कार्रवाई में हत्थे चढ़े चारों आरोपी अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं।
दीपक कुमार: धनबाद के नावाडीह स्थित डुप्लेक्स सनशाइन अपार्टमेंट का निवासी।
उमेश कुमार राय: मूल रूप से बिहार के भोजपुर (जगदीशपुर) का रहने वाला, जो फिलहाल बोकारो के दुग्दा स्थित बीसीसीएल कॉलोनी में रह रहा था।
विजय कुमार तिवारी: धनबाद के राजगंज (रोआम धड़कीड़ो) का रहने वाला।
आनंद कुमार सिंह: बिहार के सारण (छपरा) जिले का निवासी, जो वर्तमान में धनबाद के सुदामडीह में रह रहा था।
आयोग के बड़े अफसर और एजेंसी भी सीआईडी के रडार पर
यह पूरा मामला सिर्फ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। सीआईडी की जांच की सुई अब जेएसएससी के आला अधिकारियों और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी की तरफ भी घूम गई है। जांच टीम आयोग के पूर्व सचिव सुधीर गुप्ता से पहले ही लंबी पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा, परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी ‘मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी’ से जुड़े मिथिलेश सिंह की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। माना जा रहा है कि मिथिलेश की गिरफ्तारी के बाद आयोग के कई और सफेदपोशों के नाम उजागर हो सकते हैं।
अब तक डेढ़ दर्जन से ज्यादा की हो चुकी है गिरफ्तारी
वर्ष 2025 की शुरुआत में दर्ज केस कांड संख्या 01/2025 की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे धांधली की पूरी साजिश सामने आ रही है। पेपर लीक और वसूली के इस खेल में सीआईडी अब तक 18 से अधिक आरोपियों को जेल भेज चुकी है। जांच एजेंसी का साफ कहना है कि परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई अभ्यर्थी हो, दलाल हो या फिर आयोग का कोई जिम्मेदार अधिकारी।
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