
रांची : झारखंड में परिसीमन और जनगणना को लेकर विवाद गहरा गया है। आदिवासी छात्र संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर आगामी जनगणना में आदिवासियों के लिए ‘सरना धर्मकोड’ का अलग विकल्प शामिल नहीं किया गया, तो वे जनगणना और परिसीमन दोनों प्रक्रिया का पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे।
रांची में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान छात्र संघ के केंद्रीय संयोजक डॉ. सुशील कुमार मिंज ने आरोप लगाया कि 1961 में कांग्रेस शासन के दौरान एक साजिश के तहत जनगणना फॉर्म से आदिवासी धर्मकोड का कॉलम हटा दिया गया था। अब मौजूदा भाजपा सरकार भी ‘अन्य’ धर्म वाले कॉलम को हटाकर आदिवासियों की स्वतंत्र पहचान और अस्तित्व को मिटाने का प्रयास कर रही है।
चौतरफा आंदोलन का रोडमैप जारी
डॉ. मिंज ने कहा कि धर्मकोड और परिसीमन आपस में सीधे जुड़े हुए हैं। पृथक कोड न होने की वजह से आदिवासी आबादी को जबरन हिंदू धर्मकोड में गिना जा रहा है। इससे कागजों पर आदिवासियों की वास्तविक संख्या घटाई जा रही है ताकि उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण समाप्त किया जा सके। संघ की मांग है कि जिस तरह हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन धर्मों के लिए अलग कोड है, उसी तरह प्रकृति-पूजक आदिवासियों को भी सरना धर्मकोड मिले। आदिवासी छात्र संघ ने इस मुद्दे पर चौतरफा आंदोलन का रोडमैप जारी किया है
13-14 सितंबर: रांची के मोरहाबादी मैदान में ‘ऑल इंडिया ट्राइबल कल्चर’ कार्यक्रम का आयोजन, जिसमें देशभर के प्रतिनिधि शामिल होकर साझा रणनीति बनाएंगे।
18 सितंबर: गुमला से विशाल महारैली की शुरुआत कर विरोध मार्च निकाला जाएगा।
4 अक्टूबर: रांची के मोरहाबादी मैदान में एक विशाल महारैली आयोजित कर उग्र आंदोलन, भारत बंद और आर्थिक नाकेबंदी की शुरुआत की जाएगी।

