
चाईबासा : दुर्गा पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ, सुव्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा पूजा पंडालों में उपलब्ध सुविधाओं तथा समग्र व्यवस्थाओं के संबंध में आमजनों एवं श्रद्धालुओं से फीडबैक आमंत्रित किया गया है। इस पहल के माध्यम से श्रद्धालु पूजा पंडालों में सुरक्षा, स्वच्छता, बुनियादी सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण, भीड़ प्रबंधन तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से संबंधित अपने अनुभव और सुझाव साझा कर सकेंगे।
जिला प्रशासन द्वारा जारी विशेष पोस्टर में उपलब्ध क्यूआर कोड को स्कैन कर श्रद्धालु ऑनलाइन प्रश्नावली तक पहुंच सकते हैं। प्रश्नावली में पूछे गए सरल सवालों का जवाब देकर तथा आवश्यक विवरण दर्ज कर अपना फीडबैक प्रस्तुत किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से पूजा पंडालों में उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति का आकलन करने, कमियों की पहचान करने तथा भविष्य में व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
क्यूआर कोड स्कैन कर इन बिंदुओं पर दें अपना फीडबैक
श्रद्धालुओं को सबसे पहले अपना नाम, मोबाइल नंबर, पूजा समिति का नाम तथा पूजा पंडाल का स्थान एवं पता जैसी आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद उन्हें पंडाल में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं के संबंध में पूछे गए सवालों का उत्तर देना होगा।
प्रमुख बिंदु निम्नलिखित
1. पंडाल की संरचना एवं सुरक्षा पूजा पंडाल की संरचना कितनी सुरक्षित एवं मजबूत है तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं या नहीं।
2. स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन पंडाल परिसर एवं आसपास साफ-सफाई की व्यवस्था, कचरे के उचित निस्तारण तथा पर्याप्त डस्टबिन की उपलब्धता।
3. प्लास्टिक मुक्त एवं पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था प्लास्टिक एवं थर्मोकोल के उपयोग की स्थिति, पर्यावरण अनुकूल सजावट तथा प्राकृतिक एवं पर्यावरण हितैषी सामग्री का इस्तेमाल।
4. डिजिटल एवं इको-फ्रेंडली पहल पूजा समिति द्वारा डिजिटल माध्यमों तथा पर्यावरण अनुकूल अवधारणाओं को अपनाने की स्थिति।
5. पेयजल एवं शौचालय की सुविधा श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ पेयजल तथा शौचालय की पर्याप्त एवं सुलभ व्यवस्था।
6. दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं दिव्यांगजनों, बुजुर्गों तथा विशेष आवश्यकता वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक पहुंच एवं आवश्यक सहयोग की उपलब्धता।
7. भीड़ प्रबंधन एवं प्रवेश-निकास व्यवस्था श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारू बनाए रखने, भीड़ को नियंत्रित करने तथा प्रवेश एवं निकास के लिए उचित व्यवस्था।
8. मार्गदर्शन एवं संकेतक बोर्ड श्रद्धालुओं को सही दिशा बताने, प्रवेश-निकास मार्ग की जानकारी देने तथा आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने के लिए पर्याप्त साइन बोर्ड की उपलब्धता।
9. अग्निशमन एवं आपातकालीन सुरक्षा अग्निशमन उपकरणों एवं अन्य अग्नि सुरक्षा इंतजामों की उपलब्धता, बिजली के सुरक्षित कनेक्शन तथा आपातकालीन निकास मार्ग की व्यवस्था।
10. सीसीटीवी निगरानी पूजा पंडाल एवं आसपास के प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था की उपलब्धता।
11. सामाजिक जागरूकता गतिविधियां क्या पूजा समिति द्वारा रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा अथवा अन्य जनहितकारी विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
12. सांस्कृतिक कार्यक्रम क्या पूजा समिति द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं तथा उनके आयोजन की व्यवस्था कैसी रही है।
इन सवालों के माध्यम से श्रद्धालु अपने अनुभव के आधार पर संबंधित व्यवस्थाओं का आकलन कर सकेंगें तथा श्रद्धालुओं के फीडबैक के आधार पर बेहतर पूजा पंडाल को सम्मानित किया जाएगा।
फीडबैक देने की प्रक्रिया बेहद सरल
श्रद्धालुओं को अपने मोबाइल फोन से जिला प्रशासन द्वारा जारी पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करना है। इसके बाद खुलने वाली ऑनलाइन प्रश्नावली में मांगी गई जानकारी भरनी है, सभी संबंधित सवालों के उत्तर देने हैं और अंत में फॉर्म सबमिट करना है। इस प्रकार श्रद्धालु घर बैठे या पूजा पंडाल में रहते हुए भी अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कर सकते हैं।
श्रद्धालुओं की सहभागिता से बेहतर होंगी पूजा पंडालों की व्यवस्थाएं
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ पूजा समितियों द्वारा की गई व्यवस्थाओं का व्यापक आकलन करना है। आमजनों से प्राप्त फीडबैक के माध्यम से सुरक्षा, स्वच्छता, मूलभूत सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण तथा भीड़ प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा में सहयोग मिलेगा।
जिला प्रशासन की ओर से सभी श्रद्धालुओं एवं आमजनों से अपील की जाती है कि वे इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाएं, क्यूआर कोड स्कैन कर प्रश्नावली भरें तथा पूजा पंडालों में उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं के संबंध में अपना वास्तविक अनुभव साझा करें। सामूहिक सहभागिता से दुर्गा पूजा के आयोजन को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ, व्यवस्थित, समावेशी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।

