
रांची : झारखंड में बालू की उपलब्धता बढ़ने और वैध खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। मानसून के दौरान लगी रोक समाप्त होने के बाद राज्य में 16 अक्टूबर से बालू का उठाव शुरू करने की अनुमति दे दी गई है। खान एवं भूतत्व विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी किया है। हालांकि, फिलहाल राज्य के केवल 14 बालू घाटों से ही वैध रूप से बालू का उठाव किया जा सकेगा। बाकी घाटों पर खनन शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। ऐसे में बालू कारोबारियों, निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों और आम उपभोक्ताओं की नजर अब इस बात पर रहेगी कि दूसरे घाटों से उठाव कब शुरू होता है।
झारखंड में बालू खनन पर रोक खत्म, 16 अक्टूबर से उठाव की अनुमति
झारखंड में मानसून के दौरान पर्यावरण संरक्षण और नदी घाटों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बालू खनन पर रोक लगाई गई थी। यह प्रतिबंध 15 अक्टूबर को समाप्त हो गया। इसके बाद राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर से बालू के वैध उठाव की अनुमति दे दी है। खान एवं भूतत्व विभाग ने इस संबंध में जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश भेजे हैं।
सरकार के निर्देश के बाद अब निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत बालू घाटों से खनन गतिविधियां दोबारा शुरू की जा सकेंगी। हालांकि, अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि राज्य के सभी बालू घाटों से एक साथ उठाव शुरू हो जाएगा। फिलहाल 14 घाटों पर ही बालू उठाव की सुविधा उपलब्ध होगी। अन्य घाटों को चालू करने से पहले जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
झारखंड के 14 बालू घाटों से ही फिलहाल होगा उठाव
राज्य में बालू खनन पर लगी रोक हटने के बाद भी शुरुआत में बालू की आपूर्ति सीमित रहने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में केवल 14 बालू घाटों से उठाव की अनुमति दी गई है। शेष घाटों पर खनन शुरू करने के लिए संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करना आवश्यक होगा।
इस व्यवस्था के कारण अलग-अलग जिलों में बालू की उपलब्धता वहां संचालित घाटों और आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगी। जिन क्षेत्रों में अभी बालू घाटों से उठाव शुरू नहीं हुआ है, वहां आपूर्ति सामान्य होने में समय लग सकता है। हालांकि, अन्य घाटों को शुरू करने की समयसीमा और सभी 14 घाटों की जिलेवार सूची से संबंधित विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
आठ महीने तक जारी रह सकेगा बालू का वैध खनन
मानसून अवधि में रोक लगाए जाने के बाद अब बालू उठाव की अनुमति अगले आठ महीने के लिए प्रभावी होगी। इस दौरान निर्धारित नियमों के तहत बालू खनन और परिवहन किया जा सकेगा। मानसून के दौरान नदियों में जलस्तर बढ़ने और नदी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका को देखते हुए खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। मानसून समाप्त होने के बाद नियमानुसार बालू उठाव की प्रक्रिया फिर शुरू होती है।
हालांकि, आठ महीने की अवधि में खनन की अनुमति मिलने के बावजूद घाटों का संचालन संबंधित नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार ही किया जा सकेगा। जिन घाटों की जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, वहां तत्काल उठाव शुरू नहीं होगा।
बालू खनन शुरू होने से निर्माण कार्यों को मिल सकती है राहत
झारखंड में बालू का इस्तेमाल मकान निर्माण, भवन निर्माण और विभिन्न विकास योजनाओं में बड़े पैमाने पर किया जाता है। मानसून के दौरान बालू उठाव पर रोक लगने से इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में वैध खनन दोबारा शुरू होने से निर्माण कार्यों के लिए बालू की आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है।
हालांकि, शुरुआत में केवल 14 घाटों से उठाव की अनुमति मिलने के कारण आपूर्ति की स्थिति सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं होगी। निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों को अपने क्षेत्र में उपलब्ध वैध बालू घाटों और परिवहन व्यवस्था की जानकारी लेनी होगी। अन्य घाटों पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपूर्ति का दायरा बढ़ सकता है।
खान एवं भूतत्व विभाग ने उपायुक्तों को भेजा निर्देश
बालू खनन की अनुमति के संबंध में खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजा है। इसके बाद जिला स्तर पर निर्धारित नियमों के अनुरूप बालू घाटों के संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से 14 घाटों से उठाव की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

