
रांची: झारखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। हाल ही में आयोजित झारखंड प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में कंप्यूटर हैकिंग के गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच सीआईडी को सौंपने का आदेश दिया है।
मामला क्या है और क्यों बढ़ी तल्खी
यह पूरी कवायद चालू साल में 15 जनवरी से 22 फरवरी के बीच आयोजित हुई परीक्षा से जुड़ी है। परीक्षा के दौरान सेंटर पर मौजूद कंप्यूटर नंबर 19 और 28 में संदिग्ध गतिविधियां और हैकिंग की बातें सामने आई थीं। मामला तूल पकड़ते देख झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने स्थिति को संभालने के लिए प्रभावित हिस्से की दोबारा परीक्षा कराने का फैसला सुनाया।
आयोग के इस री-एग्जाम वाले फैसले से अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दे डाली। याचिकर्ताओं का सवाल था कि जब धांधली का अंदेशा है, तो सिर्फ लीपापोती से काम कैसे चलेगा?
सिर्फ 2 कंप्यूटर नहीं, पूरे सिस्टम का होगा ‘पोस्टमार्टम’
शनिवार को हुई सुनवाई में अदालत ने याचिकाकर्ताओं की आशंकाओं पर मुहर लगाते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया। जस्टिस ने साफ किया कि सीआईडी की पड़ताल सिर्फ उन दो (19 और 28 नंबर) कंप्यूटरों तक सिमटकर नहीं रहेगी, जिन पर उंगलियां उठी थीं।
अब सीआईडी इस बात की बाल की खाल निकालेगी कि परीक्षा में इस्तेमाल हुए सभी कंप्यूटरों की तकनीकी स्थिति क्या थी?
क्या हैकिंग का यह खेल सिर्फ दो सिस्टम तक सीमित था या इसके तार पूरे परीक्षा नेटवर्क से जुड़े थे?
क्या सिस्टम में बाहरी सेंधमारी की कोई सोची-समझी साजिश थी?
अभ्यर्थियों की टिकीं निगाहें
अदालत के इस फैसले के बाद अब गेंद सीआईडी के पाले में है। इस व्यापक जांच से न केवल हैकिंग के दावों की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि यह भी तय होगा कि परीक्षा की पवित्रता बरकरार थी या नहीं। हाईकोर्ट के इस सख्त कदम से उन मुन्नाभाइयों और रैकेट चलाने वालों में हड़कंप है, जो ऑनलाइन परीक्षाओं में सेध लगाने की फिराक में रहते हैं।

