
पलामू : बिहार, झारखंड और एनआईए के लिए सिरदर्द बन चुके खूंखार माओवादी नितेश यादव का सफाया करने के लिए दोनों राज्यों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। नितेश और उसके गिरोह को घेरने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर एक बेहद मजबूत संयुक्त स्पेशल टीम तैयार की है। सीमावर्ती इलाकों और बीहड़ जंगलों में तैनात इस टीम में सीआरपीएफ, एसएसबी, बिहार एसटीएफ, झारखंड जगुआर, आईआरबी, जैप और स्थानीय पुलिस के सबसे जांबाज जवान शामिल किए गए हैं।
गौरतलब है कि पूरे बिहार-झारखंड क्षेत्र में इस वक्त माओवादियों का सबसे बड़ा और खतरनाक गिरोह नितेश यादव ही चला रहा है। उस पर झारखंड सरकार ने 15 लाख और बिहार सरकार ने 3 लाख रुपये कुल 18 लाख का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा है।
डेढ़ दशक से पुलिस को दे रहा चकमा
मूल रूप से बिहार के गया (तरवाडीह) का रहने वाला नितेश पिछले 15 सालों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा है। उसके इस खूंखार दस्ते में 10 लाख रुपये का इनामी संजय गोदराम और ठेगन मियां जैसे बड़े माओवादी भी शामिल हैं। यह गिरोह पलामू, चतरा, गया और औरंगाबाद के सीमावर्ती इलाकों मिडिल जोन में पैर पसारे हुए है।
माओवादी के मददगारों की उल्टी गिनती शुरू
सुरक्षा बलों की तफ्तीश में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पलामू के हुसैनाबाद (महूदंड पंचायत) से लेकर गया और औरंगाबाद के करीब एक दर्जन से ज्यादा ऐसे गांव चिह्नित किए गए हैं, जहां नितेश का दस्ता शरण लेता है।
इतना ही नहीं, पुलिस ने ऐसे 25 से अधिक लोगों की सूची तैयार की है जो इस गिरोह की रीढ़ बने हुए हैं। ये लोग नितेश के लिए रंगदारी (लेवी) वसूलते हैं और राशन-हथियार से लेकर हर तरह की रसद (लॉजिस्टिक सपोर्ट) पहुंचाते हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि इन मददगारों में कई नामचीन कारोबारी और सफेदपोश चेहरे भी शामिल हैं, जिन पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
खून-खराबे का पुराना इतिहास
जिन गांवों में नितेश छिपता है, वे बेहद दुर्गम, घने जंगलों से घिरे और खराब मोबाइल नेटवर्क वाले इलाके हैं। 2015 से लेकर अब तक महूदंड के आसपास सुरक्षा बलों और नितेश के बीच कई आमने-सामने की मुठभेड़ें हो चुकी हैं।
सितंबर 2025: मुठभेड़ में एरिया कमांडर तुलसी यादव मारा गया, लेकिन नितेश भागने में सफल रहा।
2016: लैंडमाइन धमाका कर 7 जवानों की जान ली थी।
2013: विरोधी गुट TSPC के 15 कमांडरों का खात्मा किया था।
अब दोनों राज्यों की इस नई स्पेशल फोर्स का एक ही मकसद है- सीमा पार भागने के माओवादियों के सारे रास्ते बंद करना और इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना।
Read Also: Palamu Sand Ghat Auction : पलामू में 18 बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू, 30 सितंबर को लगेगी बोली

