
जमशेदपुर : छह महीने की उम्र पूरी होने के बाद शिशु के भोजन में धीरे-धीरे ठोस और अर्ध-ठोस चीजें शामिल करने की शुरुआत की जाती है। यह बच्चे के विकास का महत्वपूर्ण चरण होता है। इस दौरान माता-पिता के मन में भोजन की मात्रा, पौष्टिकता और उसे खिलाने के सही तरीके को लेकर कई सवाल रहते हैं।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र के अनुसार, पहली बार ठोस आहार देने का उद्देश्य बच्चे का पेट भरना नहीं, बल्कि उसे अलग-अलग स्वाद, बनावट और चम्मच से खाने की प्रक्रिया से परिचित कराना है। इसलिए शुरुआत बेहद कम मात्रा से करनी चाहिए।
छह महीने पूरे होने पर करें शुरुआत
सामान्यतः छह महीने के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ पूरक आहार दिया जा सकता है। हालांकि केवल उम्र देखना पर्याप्त नहीं है। बच्चा सहारे के साथ बैठ पा रहा हो, सिर और गर्दन संभाल रहा हो तथा भोजन में रुचि दिखा रहा हो, तो ये उसकी तैयारी के संकेत हो सकते हैं। बच्चा बार-बार खाना बाहर निकाल रहा हो या निगलने में परेशानी हो, तो डॉक्टर की सलाह लें।
कम मात्रा में दें पहला भोजन
शुरुआत में बच्चे को एक या दो छोटे चम्मच नरम भोजन दें। पहली बार में अधिक खिलाने का दबाव न बनाएं। अच्छी तरह पकी और मसली हुई दाल, चावल, खिचड़ी, सब्जी या फल उम्र और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दिए जा सकते हैं। एक समय में एक नया खाद्य पदार्थ देना बेहतर रहता है, जिससे किसी तरह की परेशानी या एलर्जी की पहचान आसानी से हो सके।
न ज्यादा गाढ़ा, न बिल्कुल पतला
भोजन इतना मुलायम होना चाहिए कि बच्चा उसे आसानी से निगल सके। शुरुआत में भोजन को अच्छी तरह मसलकर दें, लेकिन उसे पानी जैसी बहुत पतली अवस्था में देने से बचें। धीरे-धीरे उसकी बनावट में बदलाव करें, ताकि बच्चा चबाने और विभिन्न टेक्सचर पहचानने की आदत विकसित कर सके।
जबरदस्ती खिलाने से बचें
डॉ. राघवेंद्र बताते हैं कि बच्चा किसी नए स्वाद को तुरंत स्वीकार न करे तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ समय बाद वही भोजन दोबारा दिया जा सकता है। मुंह बंद करना, चेहरा दूसरी ओर घुमाना या भोजन में रुचि न दिखाना पेट भरने का संकेत हो सकता है। ऐसे में जबरदस्ती खिलाने के बजाय भोजन रोक देना चाहिए।
पोषण और स्वच्छता का रखें ध्यान
बच्चे के आहार में धीरे-धीरे अनाज, दाल, सब्जियां, फल और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। खिलाने से पहले हाथ, बर्तन और चम्मच अच्छी तरह साफ करें। बच्चे को सीधा बैठाकर तथा अपनी निगरानी में ही भोजन दें। गले में फंस सकने वाली कठोर या बड़े टुकड़ों वाली चीजें न दें।
स्तनपान भी रखें जारी
ठोस आहार शुरू होने का अर्थ स्तनपान बंद करना नहीं है। पूरक भोजन के साथ स्तनपान जारी रखा जा सकता है। यदि बच्चा भोजन बिल्कुल न ले, उसका वजन न बढ़े, उल्टी-दस्त हों, सांस लेने में परेशानी आए या एलर्जी के संकेत दिखाई दें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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