Hazaribagh: हजारीबाग के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुम्भा गांव में एक अबोध बच्ची की बलि देने का मामला सामने आया है। यहां एक मां ने महिला तांत्रिक के साथ मिलकर अपनी ही अबोध बच्ची की नरबलि दे दी। यह घटना अष्टमी की रात को अंजाम दी गई। अष्टमी की रात जब पूरा गांव उत्सव में डूबा हुआ था तो इस घर से अबोध बच्ची के चीखने चिल्लाने की आवाज आ रही थी।
पुलिस ने बुधवार को मामले का खुलासा करते हुए बच्ची की मां रेशमी देवी समेत तांत्रिक भगतनी और उसके सहयोगी भीमराम को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार कर तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
मां ने ही पकड़ रखा था बच्ची का पैर
बताते हैं कि रेशमी देवी के बेटे की तबीयत खराब थी। उसे ठीक करने के लिए रश्मि महिला तांत्रिक भगतिनी के पास गई थी। भगतिनी ने उसे झांसे में लिया और उसे उसकी बेटी की नरबलि के लिए तैयार कर लिया।
सभी ने अष्टमी की रात को घटना को अंजाम देने का प्लान बनाया। इस रात को सारा गांव उत्सव मना रहा था, लेकिन महिला तांत्रिक ने बच्ची की मां के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस जांच में पता चला है की तांत्रिक के कहने पर रेशमी देवी ने ही अपनी बेटी के पैर पकड़े। तांत्रिक ने गला घोट कर अबोध बच्ची को मार डाला। बच्ची तड़पती रही। लेकिन कलयुगी मां को उस पर तरस न आया।
बच्ची के खून से की गई थी पूजा, बगीचे में फेंका शव
इसके बाद जो बर्बरता की गई उसे सुनकर लोगों की रूह कांप जाए। बच्ची के खून से पूजा हुई और फिर शव को बगीचे में फेंक दिया गया। बच्ची का शव बरामद करने के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई थी।
हजारीबाग पुलिस और एसपी द्वारा गठित एसआईटी ने मिलकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने घटना का पर्दाफाश करते हुए हत्यारी मां रेशमी देवी, मुख्य आरोपी तांत्रिक भगतिनी और उसके सहयोगी भीमराम को गिरफ्तार कर लिया। इस अंधविश्वास की एक खौफनाक दास्तान ने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है। इलाके में इस घटना की हर तरफ चर्चा हो रही है।

