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Jharkhand High Court:आचार संहिता उल्लंघन मामले में हेमंत सोरेन बरी; हाई कोर्ट ने FIR को किया निरस्त

हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 2014 का आचार संहिता उल्लंघन मामला खारिज। 10 साल पुराने चुनावी मामले में हेमंत सोरेन को राहत, झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला।

by Kanchan Kumar
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रांची : झारखंड हाईकोर्ट से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना में वर्ष 2014 में दर्ज आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित प्राथमिकी को निरस्त कर दिया है। हेमंत सोरेन के खिलाफ 10 साल पुराने चुनावी मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला आया है।

मामले की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत में हुई। मुख्यमंत्री की ओर से अधिवक्ता दीपांकर ने पक्ष रखा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने प्राथमिकी संख्या 418/2014 को निरस्त करने का आदेश दिया।

उच्च न्यायालय ने पहले ही पश्चिम सिंहभूम की निचली अदालत में चल रही ट्रायल की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। हेमंत सोरेन ने प्राथमिकी को रद्द करने और निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को समाप्त करने की मांग को लेकर क्रिमिनल रिट याचिका दायर की थी।

हेमंत सोरेन ने याचिका में कहा था कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान वह अपनी पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार करने गए थे। उस दौरान उन्होंने किसी प्रकार की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया था। इसके बावजूद उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई थी।

याचिका में प्राथमिकी को तथ्यों और कानून के अनुरूप नहीं बताते हुए उसे निरस्त करने का आग्रह किया गया था।

आदित्यपुर थाना में दर्ज प्राथमिकी में हेमंत सोरेन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश की अवज्ञा), धारा 506 (आपराधिक धमकी) तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट) की धारा 125 के तहत आरोपित बनाया गया था। इन आरोपों के आधार पर मामला न्यायिक प्रक्रिया में था और इसकी सुनवाई पश्चिम सिंहभूम की निचली अदालत में चल रही थी।

मुख्यमंत्री की ओर से तर्क दिया गया कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने किसी भी नियम या आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया था। मामले के सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी को निरस्त करने का फैसला सुनाया।

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