
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले की गुवा सेल खदान में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। सेल प्रबंधन के इस प्रस्ताव का संयुक्त यूनियनों ने कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद उत्पादन भी प्रभावित हुआ। दरअसल, प्रबंधन गुवा खदान में कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू करना चाहता था। लेकिन झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक), सप्लाई मजदूर संघ और झारखंड मजदूर मोर्चा ने इसका विरोध किया।
यूनियनों का तर्क था कि बायोमेट्रिक का मामला जिला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में कोर्ट का फैसला आने से पहले इसे लागू करना असंवैधानिक होगा। विरोध में चारों यूनियनों ने संयुक्त आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन के कारण खदान में उत्पादन कार्य बाधित होने लगा। मामला बढ़ता देख प्रबंधन, यूनियन नेताओं और संबंधित पक्षों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। लंबी बातचीत के बाद सहमति बनी कि जिला न्यायालय का फैसला आने तक गुवा सेल में बायोमेट्रिक प्रणाली लागू नहीं की जाएगी। समझौता होने के बाद यूनियनों ने आंदोलन वापस ले लिया।
यह जीत मजदूर एकता की ताकत है- यूनियन नेता
बुधवार देर शाम झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के कार्यालय में संयुक्त यूनियनों और मजदूरों की बैठक हुई। बैठक में यूनियन नेताओं ने कहा कि यह जीत मजदूर एकता की ताकत है। नेताओं ने सभी श्रमिकों से अपील की कि आगे भी किसी समस्या पर एकजुट होकर संघर्ष करें। एकता से ही हर लड़ाई जीती जा सकती है।
कोर्ट के फैसले का इंतजार
फिलहाल गुवा खदान में पुरानी हाजिरी व्यवस्था ही जारी रहेगी। यूनियनों ने कहा कि वे कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे और मजदूर हित में आगे की रणनीति तय करेंगे।
बैठक में मौजूद मुख्य सदस्य
बैठक में अंतर्यामी महाकुड़, सिकंदर पान, विश्वजीत तांती, राजेश कोड़ा, पंचम जॉर्ज सोय, बबलू चाम्पिया, रितेश पाणिग्राही समेत बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद रहे।
Read Also- Jharkhand High Court:आचार संहिता उल्लंघन मामले में हेमंत सोरेन बरी; हाई कोर्ट ने FIR को किया निरस्त

