Ranchi : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा है कि झारखंड की मिट्टी में बिरसा मुंडा से लेकर दिशोम गुरु शिबू सोरेन तक वीरों की विरासत बसती है। यह धरती स्वाभिमान, संघर्ष और आदिवासी अस्मिता की शक्ति का प्रतीक है। देश की आजादी के महान संघर्ष में जनजातीय समाज की भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अब समय आ गया है कि हम एकजुट होकर आदिवासी समाज के अस्तित्व, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष करें।
शुक्रवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर देश के 11 राज्यों — गुजरात, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मणिपुर — से आए आदिवासी संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने यह बात कही। प्रतिनिधियों ने एक स्वर में हेमन्त सोरेन से देशव्यापी आदिवासी संघर्ष का नेतृत्व करने का आग्रह किया।
हम प्रकृति के पुजारी हैं, यही हमारी सबसे बड़ी पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा, “आदिवासी समाज प्रकृति का उपासक रहा है। पर्यावरण संरक्षण हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। लेकिन आज जल, जंगल और जमीन पर संकट गहरा रहा है। बाढ़, सूखा और भूस्खलन जैसी आपदाएं बढ़ी हैं। प्रकृति के साथ संतुलन बनाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड सरकार आदिवासी संस्कृति की रक्षा, शिक्षा में प्रगति और प्रकृति के संतुलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। “हमने झारखंड को देश का पहला राज्य बना दिया है जहां आदिवासी छात्र-छात्राएं सरकारी खर्च पर विदेश में उच्च शिक्षा ले रहे हैं। समाज में एक नई रोशनी जगी है — इसे और प्रखर बनाने के लिए सरकार हर कदम पर आपके साथ है।”
देशव्यापी जनसंपर्क अभियान में खुद निभाएंगे सक्रिय भूमिका
प्रतिनिधियों की मांग पर मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया, कहा – “आने वाले दिनों में देश के कोने-कोने में आदिवासी समाज के हक-अधिकारों के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसमें मैं स्वयं सक्रिय भूमिका निभाऊंगा। हमारी लड़ाई सिर्फ आवाज बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के एजेंडे का हिस्सा बननी चाहिए। हमें यह साबित करना है कि हम बिखरे हुए लोग नहीं, एक राष्ट्र-समुदाय हैं।”
दिशोम गुरु शिबू सोरेन को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के त्याग, संघर्ष और योगदान को याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार द्वारा आदिवासी सशक्तीकरण के लिए उठाए गए कदमों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।प्रतिनिधियों का कहना था कि झारखंड की पहल ने पूरे देश में आदिवासी समाज के बीच नई उम्मीद और ऊर्जा का संचार किया है।
उन्होंने एक स्वर में कहा – “झारखंड आज पूरे देश के आदिवासियों की आवाज बन चुका है। हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में हम एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे।”मुलाकात के दौरान मौजूद प्रमुख प्रतिनिधियों में आदिवासी संगठनों के राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल थे। यह मुलाकात आदिवासी समाज के लिए एक ऐतिहासिक एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरी।

