
Jamshedpur : झारखंड हाईकोर्ट ने टाटा स्टील और झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा, तत्कालीन आयडा) के बीच भूमि लागत, ब्याज, मेंटेनेंस लेवी और लीज डीड से जुड़े करीब 18 वर्ष पुराने विवाद के समाधान का रास्ता साफ करते हुए जियाडा को छह सप्ताह के भीतर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो जियाडा और टाटा स्टील के अधिकारी आपसी बैठक कर विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान भी निकाल सकते हैं।
टाटा स्टील ने 2008 में दायर रिट याचिका के माध्यम से तत्कालीन आयडा के 9 जुलाई 2005 के आदेश को चुनौती दी थी। कंपनी का कहना था कि वर्ष 1990-91 से 2001-02 की अवधि के लिए 14.91 लाख रुपये की मूल भूमि लागत पर ब्याज की मांग कानूनसम्मत नहीं है, क्योंकि मूल राशि की पहली मांग 2 मई 2001 को की गई थी। ऐसे में उससे पहले की अवधि का ब्याज वसूलना न्यायसंगत नहीं है।
कंपनी ने 47.71 लाख रुपये प्रतिवर्ष की मेंटेनेंस लेवी को भी चुनौती देते हुए कहा कि यह शुल्क राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना लगाया गया, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा शुल्क एकमुश्त लगाया जा सकता है, हर वर्ष नहीं। इसके अलावा टाटा स्टील ने 42.68 एकड़ भूमि से संबंधित लीज डीड हटाने की भी मांग की थी।
सुनवाई के दौरान टाटा स्टील की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि विवाद के समाधान के लिए कंपनी ने जियाडा के समक्ष नया अभ्यावेदन दायर किया है। जियाडा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार तथा राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने भी इस पर सहमति जताई कि पहले प्राधिकरण अभ्यावेदन पर निर्णय ले।
इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर जियाडा कानून के अनुरूप अभ्यावेदन पर विचार कर निर्णय ले। इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निष्पादन कर दिया।

