
रांची: झारखंड की जेलों में इन दिनों व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की प्रशासनिक कवायद तेज कर दी गई है। इसी कड़ी में, राज्य के जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने बुधवार को हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा का अचानक दौरा किया। उनके इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल के अंदर की असल तस्वीर देखना और बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत परखना था।
कैदियों से सीधी बात और बच्चों का हालचाल
निरीक्षण के दौरान जेल आईजी का अंदाज पूरी तरह से अलग और दोस्ताना नजर आया। उन्होंने सिर्फ फाइलों या कागजी रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय सीधे बंदियों से संवाद किया। जेल के भीतर कैदियों की रोजमर्रा की जिंदगी कैसी चल रही है, उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सहूलियतें ठीक से मिल रही हैं या नहीं, इन सभी बातों की जानकारी उन्होंने खुद कैदियों से ही ली।
इसके साथ ही, जेल के अंदर महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों से भी आईजी ने मुलाकात की। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि जेल की चार दीवारों के भीतर इन बच्चों की स्कूली पढ़ाई लिखाई सुचारू रूप से चल रही है या नहीं, क्योंकि बच्चों का भविष्य हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए। इस दौरान कैदियों के बीच जरूरत का सामान भी वितरित किया गया।

भोजन वितरण के लिए नई ट्रॉली व्यवस्था की शुरुआत
जॉब और सुरक्षा के लिहाज से जेलों में कैदियों तक समय पर और सही तरीके से खाना पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होती है। इस समस्या का समाधान निकालते हुए झारखंड के सभी जिलों की जेलों में भोजन पहुंचाने के लिए विशेष ट्रॉली की व्यवस्था की गई है। हजारीबाग जेल में इस नई व्यवस्था का जायजा लेते हुए जेल आईजी ने खुद इसकी कार्यप्रणाली को परखा। उम्मीद जताई जा रही है कि इस नई पहल से कैदियों को खाना मिलने की प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित हो जाएगी।
हरियाली और संस्कृति का अनूठा संगम
दौरे का समापन बेहद सकारात्मक माहौल में हुआ। जेल पहुंचने पर सबसे पहले गार्ड ऑफ ऑनर देकर आईजी का स्वागत किया गया। इसके बाद वहां के बंदियों ने झारखंड की पारंपरिक और सांस्कृतिक शैली से उनका अभिवादन किया। इस सकारात्मक ऊर्जा के बीच जेल परिसर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए जेल आईजी ने रुद्राक्ष और आंवला के पौधे भी रोपे।
यह पूरा दौरा इस बात का गवाह रहा कि अब जेलों को केवल सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि सुधार और मानवीय संवेदनाओं का केंद्र बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।

