RANCHI: झारखण्ड में औद्योगिक विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड सरकार के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की दावोस और यूनाइटेड किंगडम यात्रा के परिणाम दिख रहे है। इसी क्रम में जिंदल समूह ने झारखण्ड में स्टील और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में 70,000 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव दिया है।

यूनाइटेड किंगडम में हुई बैठकों के दौरान जिंदल समूह के प्रतिनिधियों ने सरकार को लेटर ऑफ इंटेंट सौंपा। यह निवेश राज्य में औद्योगिक विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा संक्रमण को मजबूती देगा। सरकार का मानना है कि यह प्रस्ताव झारखण्ड की निवेश-अनुकूल नीतियों और स्थिर शासन व्यवस्था पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
सबसे ज्यादा निवेश स्टील में
निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा स्टील सेक्टर में प्रस्तावित है। पतरातू में 6 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता का एकीकृत स्टील प्लांट स्थापित करने की योजना है। जिसमें आधुनिक और कम-उत्सर्जन तकनीक का उपयोग होगा। यह संयंत्र इंफ्रास्ट्रक्चर, परिवहन, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों के लिए उच्च गुणवत्ता का स्टील उपलब्ध कराएगा।
इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 1,400 मेगावाट क्षमता की परमाणु ऊर्जा परियोजना और 140 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना में भी निवेश का प्रस्ताव दिया गया है। ये परियोजनाएं देश के ऊर्जा सुरक्षा और डी-कार्बनाइजेशन के लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करेंगी। इस निवेश से राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। अनुमान है कि करीब 11,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इससे एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र को भी व्यापक लाभ मिलेगा, जिससे राज्य में समावेशी और सतत विकास को गति मिलेगी।
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