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Jharkhand Bureaucracy :  ईमानदारी के मारे ‘बेचारे’ | Jharkhand Liquor Scam

नौकरशाही वाले मुहल्ले में कोई न कोई ऐसी कहानी जरूर रहती है, जिसकी चर्चा चहुंओर होती है। दरअसल यह मुहल्ला ही कथा, पटकथा, अभिनय व निर्देशन जैसे फिल्मी शब्दों के लिए सटीक बैठता है। मौजूदा प्रकरण 'मधुशाला' से जुड़ा है। 'चौबे चालीसा' हर दिन समाचार पत्रों की सुर्खियां बन रही है। तार से तार जोड़े जा रहे हैं। सिरे तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सिरा लंबा होता नजर आ रहा है। आखिर क्या चल रहा है अंदरखाने, जानें द फोटोन न्यूज के एक्जीक्यूटिव एडिटर की कलम से।

by Dr. Brajesh Mishra
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Jharkhand Bureaucracy : गुरु भुनभुना रहे थे। नजदीक पहुंचा। देखा अखबार पलट रहे हैं। दूरी और कम होने पर आभास विश्वास में बदल गया। दरअसल, गुरु ‘नाद योग’ साध रहे थे। अखबारी ‘शब्द’ के जरिए ‘ब्रह्म’ से जुड़ रहे थे। भारतीय दर्शन, विशेषकर वेदांत और योग में ‘शब्द ब्रह्म’ की गहन अवधारणा है। ऐसी मान्यता है कि ‘ध्वनि ही ब्रह्म है’। यही ‘परम सत्य’ है। ‘शब्द’ और ‘ब्रह्म’ के एकाकार से ‘नाद’ उत्पन्न होता है। यह सृष्टि का मूल स्रोत और चेतना का आधार है। गुरु के सम्मुख आते ही ‘दर्शन’ दृश्य में परिवर्तित हो गया।

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पहले हाथ जोड़कर प्रणाम किया, फिर उनके इशारे का अनुसरण कर सान्निध्य में आसन जमा लिया। धैर्य से कुछ नया, कुछ चटपटा मिलने का लोभ लिए इंतजार करता रहा। गुरु का ध्यान टूटते ही सवाल दाग दिया- कोई रोचक प्रसंग मिल गया था क्या गुरु? गुरु बोले- अरे नहीं। अखबारी पन्नों में खुलासों की खबर ले रहा था। ईमानदारी के मारे ‘सारे’ एक जैसी ही गवाही झोंक रहे हैं। कहा- बात बिल्कुल सही कह रहे हैं गुरु, लेकिन हकीकत क्या है, यही जानने की प्रबल इच्छा लेकर पहुंचे हैं। गुरु बोले- अखबारी पन्नों पर लिखी जा रही स्क्रिप्ट और असल बयान में तथ्य व कथ्य का अंतर नजर आ रहा है। पन्ने पलटने से तो ऐसा लग रहा कि जैसे सब अपनी गलती स्वीकार कर रहे।

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हकीकत इससे थोड़ी जुदा है। यह कोई नहीं मान रहा कि गलती की। सबने अपनी गवाही में किंतु-परंतु जोड़कर खुद को बचाने की भरपूर कोशिश की है। अपने कथन से यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि ‘चौबे की चालीसा’ सुनने की मजबूरी थी। सो, सुनी जरूर, लेकिन गुनी नहीं। बेचारे, करें भी तो क्या? दुविधा के ऐसे दोराहे पर खड़े हैं, जहां एक तरफ कुआं और दूसरी ओर खाई है। बयानों के बीच से कुछ शब्द क्या छूट रहे, कलेजा मुंह को आ रहा है। कोई कर्ण कवच-कुंडल विहीन नजर आ रहा। कोई अमिट कथा लिखवा रहा।

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कोई फैज की शायरी सुना रहा, कोई विनय निवेदन कर रहा। बहरहाल, फिलहाल मामला ए से सी के बीच है। लिहाजा दाएं-बाएं पलटी मारने की भरपूर गुंजाइश है। अगर इस कहानी में कहीं इ से डी वालों ने रुचि दिखानी शुरू की, तो किरदार बदल जाएंगे। फिर कर्ता और कर्म की पुनर्व्याख्या होने लगेगी। ‘चौबे’, ‘चिंटू’ की कौन कहे ‘चाचा’ तक का बचना मुश्किल हो जाएगा।

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गुरु की बात से यह तो साफ था कि लीक हुई स्क्रिप्ट पूरी फिल्मी कहानी से थोड़ी कम तो है, लेकिन उससे इतर भी है। एक चर्चा में रहने वाला डायलॉग याद आ रहा था, ‘ये तो केवल ट्रेलर है, फिल्म अभी बाकी है मेरे दोस्त! तथ्य पर तर्क के लिए वर्क की जरूरत थी। लिहाजा, गुरु को हाथ जोड़े और विदा लिया।

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