
सरकारी निर्माण कार्यों में बालू-पत्थर की खरीद के लिए वैध चालान अनिवार्य
नियम तोड़ने पर ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं पर भी लगाया जाएगा आर्थिक दंड
झारखंड लघु खनिज समनुदान द्वितीय संशोधन नियमावली-2026 लागू
रांची : झारखंड में अवैध खनन, खनिजों के भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। अब बिना अनुमति ईंट बनाने के लिए मिट्टी निकालने पर ईंट भट्ठा संचालकों से निर्धारित स्वामित्व राशि का 10 गुना जुर्माना वसूला जाएगा। वहीं, सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले बालू, पत्थर और मिट्टी की खरीद के लिए वैध चालान अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित ठेकेदार, संवेदक और आपूर्तिकर्ता भी आर्थिक दंड के दायरे में आएंगे। इस संबंध में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत झारखंड लघु खनिज समानुदान (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2026 लागू कर दी गई है इन संबंध में 4 नवंबर 2026 को अधिसूचना जारी हो कि गई है।
संशोधित नियम के तहत ईंट बनाने में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी का बिना वैध पट्टा, अनुज्ञप्ति या अनुमति के उत्खनन और निकासी करने पर कार्रवाई होगी। इसके अलावा बिना वैध दस्तावेज के मिट्टी का भंडारण और परिवहन करना भी दंडनीय होगा। ईंट भट्ठा संचालक निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशि जमा कर वैध अनुज्ञापत्र प्राप्त नहीं करते हैं, तो उनसे अनुसूची-3 में निर्धारित स्वामित्व राशि का 10 गुना जुर्माना वसूला जाएगा। यह प्रावधान मिट्टी निकालने वाले व्यक्ति के साथ उसके एजेंट, मैनेजर, कर्मचारी और ठेकेदार पर भी लागू होगा।
सरकारी काम में खनिज खरीद का देना होगा चालान
सरकारी निर्माण और विकास योजनाओं में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों की खरीद को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं। नए नियम-55 के तहत केंद्र और राज्य सरकार के कार्य विभागों, संवेदकों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को बालू, पत्थर, मिट्टी समेत अन्य खनिज वैध स्रोत से ही खरीदने होंगे। खनिज किसी वैध खनन पट्टाधारक या अनुज्ञप्तिधारक से खरीदा जाना चाहिए। खरीद के साथ वैध चालान रखना अनिवार्य होगा।
खनिज मूल्य के साथ दोगुनी स्वामित्व राशि का जुर्माना
बिना वैध चालान के खनिज का इस्तेमाल या आपूर्ति करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था से खनिज मूल्य और स्वामित्व राशि की दोगुनी रकम वसूली जाएगी। इसके अलावा जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ), प्रबंधन शुल्क, पर्यावरणीय उपकर और आयकर के बराबर निर्धारित राशि भी जमा करनी होगी। नियमावली में जुर्माने की गणना का प्रावधान भी स्पष्ट किया गया है। इसके अनुसार खनिज मूल्य और स्वामित्व राशि को जोड़कर दोगुना किया जाएगा। इसके बाद डीएमएफ, प्रबंधन शुल्क, पर्यावरणीय उपकर और आयकर की राशि भी जोड़ी जाएगी।
सरकारी विभागों और निगमों पर भी लागू होगा नियम
नए प्रावधान के दायरे में केवल सरकारी विभाग ही नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की कंपनियां, निगम, उपक्रम और अन्य सरकारी निकाय भी आएंगे। निर्माण कार्यों के लिए कार्यादेश जारी करने वाले सभी संबंधित निकायों को खनिज की वैध खरीद सुनिश्चित करनी होगी। इनके साथ अनुबंध के तहत काम करने वाले ठेकेदार और आपूर्तिकर्ता भी नियम के दायरे में होंगे।
पुराने मामलों के लिए भी जुर्माने का प्रावधान
संशोधन में पुराने मामलों के लिए भी जुर्माने की व्यवस्था की गई है। जिन मामलों में नए नियम लागू होने से पहले खनिज का इस्तेमाल या आपूर्ति की जा चुकी है, उनमें स्वामित्व राशि के साथ डीएमएफ, प्रबंधन शुल्क, पर्यावरणीय उपकर और आयकर जैसी देनदारियों के आधार पर राशि तय की जाएगी।
खान निदेशक जारी कर सकेंगे दिशा-निर्देश
नियमावली में नियम-66 के बाद नियम-67 भी जोड़ा गया है। इसके तहत किसी प्रक्रिया या मार्गदर्शक सिद्धांत का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने पर खान निदेशक आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकेंगे। इसका उद्देश्य नियमों के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करना है। नए प्रावधानों के लागू होने से ईंट भट्ठा संचालकों के साथ सरकारी निर्माण योजनाओं में काम करने वाले ठेकेदारों और खनिज आपूर्तिकर्ताओं को भी खरीद, भंडारण और परिवहन से जुड़े दस्तावेज दुरुस्त रखने होंगे। बिना वैध अनुमति या चालान के खनिज का इस्तेमाल करने पर आर्थिक दंड देना पड़ेगा।

