
वित्त विभाग ने जारी की अधिसूचना, स्याही से हस्ताक्षर करने की अनिवार्यता खत्म, आधार आधारित ई-साइन और डिजिटल सिग्नेचर से भी हो सकेगा भुगतान
रांची : झारखंड में सरकारी भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सरकारी बिलों के भुगतान के लिए जिम्मेदार निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) को कागज पर स्याही से हस्ताक्षर करना अनिवार्य नहीं होगा। इसके स्थान पर आधार आधारित ई-साइन, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) समेत सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस संबंध में वित्त विभाग ने 06 नवंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर झारखंड कोषागार संहिता, 2016 में संशोधन किया है। इस संशोधन को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति भी प्राप्त है।
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार, कोषागार संहिता के नियम 131 में पहले प्रावधान था कि प्रत्येक विपत्र पर जिम्मेदार निकासी पदाधिकारी के हस्ताक्षर या संक्षिप्त हस्ताक्षर के साथ भुगतान आदेश होना चाहिए। इसमें भुगतान की राशि शब्दों और अंकों दोनों में दर्ज करना अनिवार्य था। साथ ही सभी भुगतान आदेशों पर स्याही से हस्ताक्षर करने की शर्त थी। अब इस शर्त को हटा दिया गया है।
संशोधित प्रावधान में हस्ताक्षर की नई परिभाषा भी शामिल की गई है। इसके तहत हाथ से स्याही से किए गए हस्ताक्षर के अलावा आधार आधारित ई-साइन और डिजिटल हस्ताक्षर को भी मान्यता दी गई है। भारत सरकार या झारखंड सरकार के कानून के तहत मान्य अथवा राज्य के वित्त विभाग से अधिसूचित या स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर भी इसके दायरे में आएंगे।
पेपरलेस भुगतान की पहले ही शुरू हो चुकी है व्यवस्था
दरअसल, वित्त विभाग पहले ही सरकारी भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की पहल कर चुका है। एक सितंबर 2026 से कंटीजेंट बिल, वेतन बिल, यात्रा भत्ता बिल, गृह निर्माण अग्रिम और मोटर कार अग्रिम के भुगतान के लिए ई-साइन या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इसी तरह पेंशन की स्वीकृति और भुगतान से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को भी ई-पेंशन पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से पूरा करने का प्रावधान किया गया है।

