Ranchi: झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। चुनाव से पहले स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की बजाय अब बहस इस बात पर केंद्रित हो गई है कि निकाय चुनाव दलीय आधार पर हों या गैर-दलीय। भाजपा की ओर से दलीय आधार पर चुनाव कराने की मांग ने राज्य की राजनीति को साफ तौर पर दो खेमों में बांट दिया है।
भाजपा का कहना है कि दलीय चुनाव होने से मतदाताओं को यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि प्रत्याशी किस विचारधारा और राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करता है। इससे शहरी विकास को दिशा मिलेगी और चुने गए जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय होगी। पार्टी का दावा है कि कई राज्यों में नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर होते हैं और वहां शहरी प्रशासन अधिक संगठित और जवाबदेह नजर आता है।
वहीं कांग्रेस ने भाजपा की इस मांग पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि भाजपा के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह बेवजह विवाद खड़ा कर रही है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष पहले ही यह तय हो चुका था कि नगर निकाय चुनाव गैर-दलीय आधार पर होंगे, उस समय भाजपा ने कोई आपत्ति नहीं जताई। अब चुनाव नजदीक आते ही भाजपा इसे मुद्दा बनाकर उलझाने का प्रयास कर रही है।
राज्य सरकार और प्रशासनिक स्तर पर नगर निकाय चुनाव गैर-दलीय आधार पर कराने की तैयारी है। हालांकि हकीकत यह भी है कि चुनाव गैर-दलीय होने के बावजूद राजनीतिक दल अंदरखाने अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। प्रत्याशियों के चयन से लेकर प्रचार की दिशा और संगठनात्मक समर्थन तक, सब कुछ दलीय सोच के तहत ही तय किया जा रहा है।
इसके साथ ही सामाजिक संगठन और शहरी नागरिक समूह भी सक्रिय हो गए हैं। आने वाले दिनों में झारखंड की सियासत में यह मुद्दा और गर्माने के संकेत दे रहा है।
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