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Jharkhand Education: नदी, पहाड़, झरनों के साथ बच्चों की पुस्तकों में दिखेगी झारखंडी संस्कृति

by Kanchan Kumar
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रांची। झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली नई पाठ्यपुस्तकों में अब राज्य की समृद्ध जनजातीय और स्थानीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई देगी। पुस्तकों के कवर से लेकर अंदर के डिजाइन और लेआउट तक में झारखंड की परंपराओं, त्योहारों और जीवनशैली को शामिल किया जाएगा।

झारखंड शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) द्वारा कक्षा 3 से 8 तक की नई किताबें तैयार की जा रही हैं। इन पुस्तकों को आधुनिक और आकर्षक बनाने के साथ-साथ स्थानीय संदर्भों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इसके लिए डिजाइन, इलस्ट्रेशन और लेआउट तैयार करने की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को दी जाएगी। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने एजेंसी चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

छह चरणों में होगा डिजाइन का काम

नई किताबों के डिजाइन और लेआउट का कार्य छह अलग-अलग लॉट में बांटा जाएगा। एक एजेंसी को एक या उससे अधिक लॉट का काम दिया जा सकता है। कुल मिलाकर करीब 5700 से 6000 पेज के डिजाइन तैयार किए जाएंगे। सितंबर तक इस काम को पूरा करने की समय सीमा तय की गई है। चयनित एजेंसी को एंड-टू-एंड डिजाइन, विजुअल प्रस्तुति और प्री-प्रेस प्रोडक्शन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

बच्चों के अनुकूल होगा डिजाइन

नई पुस्तकों में पेज ग्रिड, मार्जिन, टेक्स्ट फ्लो, फॉन्ट और रंगों का चयन बच्चों की समझ और सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसके साथ ही एक्टिविटी और वर्कशीट पेज को भी आकर्षक और उपयोगी बनाया जाएगा। डिजाइन तैयार करते समय बच्चों की उम्र, जेंडर संवेदनशीलता और सांस्कृतिक विविधता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि पढ़ाई को अधिक रोचक बनाया जा सके।

पाठ्यक्रम के अनुसार हो रहा निर्माण

ये नई किताबें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 और झारखंड के स्टेट करिकुलम फ्रेमवर्क के आधार पर तैयार की जा रही हैं। इससे शिक्षा को स्थानीय और व्यवहारिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इन तत्वों की दिखेगी झलक

नई किताबों में झारखंड के जनजीवन को प्रमुखता दी जाएगी। इनमें जनजातीय समुदाय, स्थानीय त्योहार जैसे करमा, सोहराय, टुसु और सरहुल, ग्रामीण-शहरी जीवन, आजीविका के साधन, जंगल, झरने, नदियां और वन्यजीवों को शामिल किया जाएगा।

चरणबद्ध तरीके से लागू होंगी नई किताबें

शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 1 और 2 की नई पुस्तकें लागू की जाएंगी। वहीं कक्षा 3 से 8 तक की किताबें 2027-28 सत्र से लागू होने की संभावना है। यह पहल न केवल शिक्षा को रोचक बनाएगी, बल्कि छात्रों को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़ने में भी मददगार साबित होगी।

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