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Jharkhand 16th Finance Commission : केंद्रीय कर में झारखंड की हिस्सेदारी मात्र 3.3% : क्या 16वां वित्त आयोग बदलेगा आर्थिक तस्वीर?

by Rakesh Pandey
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रांची : झारखंड को केंद्र से मिलने वाली कर हिस्सेदारी पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वर्तमान में राज्य को केंद्रीय कर संग्रहण में महज 3.307% हिस्सेदारी प्राप्त है, जो देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। इस असंतुलन को दूर करने की दिशा में 16वें वित्त आयोग के सुझाव निर्णायक हो सकते हैं। आयोग की टीम इन दिनों राज्यों के दौरे पर है और झारखंड में भी वित्तीय हालात का आकलन कर रही है।

केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी तय करता है वित्त आयोग

संविधान के तहत, केंद्रीय कर संग्रहण का 41% हिस्सा राज्यों को दिया जाता है, जिसे वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्यों के बीच विभाजित किया जाता है। यह फॉर्मूला मुख्य रूप से जनसंख्या, क्षेत्रफल, तुलनात्मक आय, वन क्षेत्र, वित्तीय प्रयास और जनसांख्यिकी जैसे छह प्रमुख मानकों पर आधारित होता है।

15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड की हिस्सेदारी 3.307% ही क्यों?

वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक झारखंड को निम्नलिखित वित्तीय हिस्सेदारी मिली/मिलने की उम्मीद है:

  • 2020-21: 19,712.23 करोड़
  • 2021-22: 27,734.65 करोड़
  • 2022-23: 31,404.12 करोड़
  • 2023-24: 37,352.35 करोड़
  • 2024-25 (अनुमानित): 40,338.22 करोड़

यह हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश (17.9%), बिहार (10.1%), पश्चिम बंगाल (7.5%) और छत्तीसगढ़ (3.4%) जैसे राज्यों से कम है।

हिस्सेदारी निर्धारण के लिए वित्त आयोग के प्रमुख मानक


15वें वित्त आयोग ने राज्यों की हिस्सेदारी तय करने के लिए 100 अंकों का स्कोरिंग सिस्टम अपनाया था, जिसमें शामिल थे:

  • तुलनात्मक आय – 45 अंक
  • जनसंख्या (2011) – 15 अंक
  • क्षेत्रफल – 15 अंक
  • कर और वित्तीय प्रयास – 2.5 अंक
  • वन और पारिस्थितिकी – 10 अंक
  • जनसांख्यिकी – 12.5 अंक

झारखंड की मांग: 16वें वित्त आयोग से बदलाव की उम्मीद

झारखंड सरकार ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए हिस्सेदारी में सुधार की मांग की है। राज्य का कहना है कि वन क्षेत्र, पारिस्थितिकी संरक्षण और खनिज संसाधनों में योगदान के बावजूद उसे पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिल रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि आयोग इन पहलुओं पर विशेष वज़न देता है तो झारखंड की हिस्सेदारी में वृद्धि संभव है।

क्या बढ़ेगा केंद्रीय हिस्सेदारी का प्रतिशत?

वर्तमान में राज्यों को केंद्र से मिलने वाली कर राशि का 41% हिस्सा वितरित किया जाता है। कई राज्य, जिनमें झारखंड भी शामिल है, इस हिस्सेदारी को 50% या उससे अधिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर 16वां वित्त आयोग इस मांग पर सकारात्मक सिफारिश करता है, तो 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक राज्य को मिलने वाली राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

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