फीचर डेस्क : दुर्गा पूजा की तैयारी अब अपने अंतिम चरण में है। महालया के साथ ही इस पर्व की शुरुआत होने जा रही है। दुर्गा पूजा में महालया का विशेष महात्म्य होता है, क्योंकि यह देवी दुर्गा के धरती पर आगमन का प्रतीक है।
‘महालया’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘महा’ और ‘आलय’ से बना है, जिसका अर्थ होता है ‘महान निवास’ या ‘देवी का घर’। मान्यता है कि इस दिन देवी दुर्गा भगवान शिव के निवास स्थल कैलाश पर्वत से अपने भक्तों के बीच उतरने के लिए अपनी यात्रा आरंभ करती हैं। नवरात्र का यह समय हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
कब है महालया
हर साल आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या तिथि, जो पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है, पर महालया मनाया जाता है। इस वर्ष, हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष का आखिरी दिन बुधवार, 02 अक्टूबर को है। इसलिए महालया भी इसी दिन मनाया जाएगा।
महालया के दिन मूर्तिकार मां दुर्गा के नेत्र को अंतिम रूप देते हैं, और इसके बाद देवी दुर्गा की प्रतिमा संपूर्ण आकार ले लेती है। दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की प्रतिमा का विशेष महत्व होता है, जो न केवल पंडालों की शोभा बढ़ाती है, बल्कि श्रद्धालु प्रतिमा का दर्शन कर मां की भक्ति में लीन हो जाते हैं।
इसी दिन देवी ने किया था महिषासुर का संहार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महालया के दिन ही अत्याचारी राक्षस महिषासुर का संहार करने के लिए भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान महेश ने मां दुर्गा का रूप धारण किया था। महिषासुर को वरदान था कि कोई भी देवता या मनुष्य उसका वध नहीं कर सकता। इस वरदान के कारण महिषासुर राक्षसों का राजा बन गया और देवताओं पर लगातार आक्रमण करता रहा।
एक बार देवताओं का महिषासुर से युद्ध हुआ, जिसमें देवता हार गए और देवलोक में महिषासुर का राज स्थापित हो गया। तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णु और आदिशक्ति की आराधना की। इस दौरान, देवताओं के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली, जिसने मां दुर्गा का स्वरूप धारण किया।
9 दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। इस प्रकार, महालया को मां दुर्गा के धरती पर आगमन का दिन माना जाता है। मां दुर्गा शक्ति की देवी हैं, और उनका स्वागत पूरे श्रद्धा भाव से किया जाता है।

