
लातेहार : झारखंड के लातेहार जिले में बिजली के करंट की चपेट में आने से एक जंगली हाथी की मौत हो गई। घटना बालूमाथ थाना क्षेत्र के कोमर गांव के पास रविवार देर रात करीब 2 बजे हुई। हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर गांव के आसपास पहुंचा था। इसी दौरान एक हाथी खेत में पहुंच गया और वहां लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से हाथी की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद इलाके में इसकी जानकारी फैलते ही ग्रामीणों के बीच हलचल मच गई। सूचना वन विभाग तक पहुंचाई गई, जिसके बाद अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया। विभाग की टीम अब हाथी की मौत से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
कोमर गांव में रात के समय पहुंचा था हाथियों का झुंड
स्थानीय लोगों के अनुसार, रविवार रात जंगली हाथियों का एक झुंड कोमर गांव के आसपास पहुंचा था। हाथी खेतों में लगी फसलों की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान झुंड का एक हाथी उस खेत में चला गया, जहां फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए बिजली के तार लगाए गए थे।
बताया जा रहा है कि खेत में लगाए गए बिजली के तार में करंट प्रवाहित हो रहा था। हाथी जैसे ही तार के संपर्क में आया, वह करंट की चपेट में आ गया। गंभीर रूप से प्रभावित होने के कारण उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
वन विभाग ने शुरू की जांच
हाथी की मौत की सूचना मिलने के बाद जिला वन पदाधिकारी प्रवेश अग्रवाल के निर्देश पर वन विभाग की टीम कोमर गांव पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
वन विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि खेत में बिजली का तार किस तरह लगाया गया था और उसमें करंट किस स्रोत से प्रवाहित हो रहा था। घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट होगी मौत की पूरी वजह
रेंज फॉरेस्ट अधिकारी नंदकुमार महतो ने बताया कि हाथी की मौत की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर जांच कर रही है। हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए चिकित्सकीय टीम गठित की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हाथी की मौत से जुड़े सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खेतों में बिजली के तार लगाने को लेकर जांच
घटना के बाद खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए बिजली के तार लगाए जाने के मामले ने भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वन विभाग की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तार किस उद्देश्य से लगाए गए थे और क्या उन्हें नियमों के अनुरूप लगाया गया था।
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