
फीचर डेस्क : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अजा एकादशी का भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी पर श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। व्रत का पारण 8 सितंबर की सुबह 6 बजकर 2 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट के बीच किया जा सकेगा।
अजा एकादशी की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इसलिए इस दिन तुलसी से जुड़े कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।
तुलसी पूजा में गंगाजल अर्पित करें
अजा एकादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसी दौरान तुलसी के पौधे की भी पूजा की जा सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी के पौधे पर थोड़ी मात्रा में गंगाजल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
गंगाजल अर्पित करने के बाद तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
भगवान विष्णु के भोग में जरूर रखें तुलसी
भगवान विष्णु को अर्पित किए जाने वाले भोग में तुलसी दल रखने की परंपरा रही है। अजा एकादशी के दिन भी श्रीहरि को लगाए जाने वाले भोग में तुलसी का पत्ता शामिल किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा और भोग को पूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए पूजा की तैयारी करते समय तुलसी दल (पत्र या पत्ता) को भी शामिल किया जाता है। तुलसी दल साफ और पवित्र अवस्था में भगवान को अर्पित करने की परंपरा है।
तुलसी के पास बैठकर विष्णु मंत्र का जाप करें
अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना के दौरान मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। तुलसी के पौधे के पास बैठकर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ और ‘ॐ नमो नारायणाय’ जैसे मंत्रों का जाप करने की धार्मिक परंपरा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं। मान्यता के अनुसार, नियमित मंत्र जाप से मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक वातावरण बनाने में सहायता मिलती है।
तुलसी की माला धारण करने की परंपरा
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी की माला का भी धार्मिक महत्व बताया गया है। अजा एकादशी के दिन पूजा करते समय तुलसी की माला धारण करने की परंपरा का पालन किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी की माला भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इसे धारण कर श्रीहरि का स्मरण और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। हालांकि, माला धारण करने से संबंधित परंपराएं अलग-अलग संप्रदायों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।
शाम को तुलसी के पास जलाएं घी का दीपक
अजा एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने की भी परंपरा है। इसके लिए गाय के घी का दीपक जलाया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी के समीप दीपक जलाने से घर में शुभता और सकारात्मकता का वातावरण बनता है।
दीपक जलाने के बाद तुलसी की श्रद्धापूर्वक पूजा और भगवान विष्णु का स्मरण किया जाता है। इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना करने की धार्मिक परंपरा भी है।
8 सितंबर को होगा व्रत का पारण
अजा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण का समय भी महत्वपूर्ण होता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को सुबह 6 बजकर 2 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट के बीच किया जाएगा।
अजा एकादशी पर तुलसी पूजा से जुड़े इन नियमों का पालन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किया जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने, तुलसी के पास मंत्र जाप करने और शाम को दीपक जलाने जैसी परंपराएं इस दिन की पूजा का हिस्सा मानी जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि और परंपराओं में अंतर हो सकता है।

