
रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा धांधली मामले में अपराध अनुसंधान विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है। जांच टीम ने पटना से राजन कुमार नाम के एक मुख्य बिचौलिये को गिरफ्तार किया है। राजन पर आरोप है कि उसने अभ्यर्थियों से भारी रकम वसूल कर उन्हें परीक्षा के प्रश्न और उत्तर रटवाने के लिए ठिकानों तक पहुंचाया।
बंगाल के होटल में रखकर रटवाए गए सवाल
जांच में खुलासा हुआ है कि राजन और उसके साथियों ने अभ्यर्थियों को पश्चिम बंगाल के नियमातपुर स्थित एक होटल में ठहराया था। वहां परीक्षा से ठीक पहले उन्हें प्रश्नपत्र और उनके उत्तर रटवाए गए। इस अवैध रास्ते से कई अभ्यर्थियों को परीक्षा में सीधा फायदा मिला और उनमें से कुछ सफल भी घोषित हो गए।
135 में से 120 सवाल परीक्षा में हूबहू मिले
गिरफ्तारियों के बाद इस पूरे मामले की जांच की दिशा बदल गई है। शुरुआत में इसे सिर्फ अभ्यर्थियों से अवैध वसूली का मामला माना जा रहा था। हालांकि, हालिया पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि बोकारो से लेकर नेपाल और बंगाल तक अभ्यर्थियों को ले जाकर 135 सवाल रटवाए गए थे। हैरानी की बात यह है कि परीक्षा में इनमें से 120 सवाल हूबहू आ गए।
लाखों की रिश्वत और एजेंसी की मिलीभगत
मामले का बड़ा पर्दाफाश टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी की गिरफ्तारी के बाद हुआ। अभय ने खुद स्वीकार किया कि उसने अपनी पत्नी, भाई और खुद के लिए परीक्षा एजेंसी आइसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह को 12-12 लाख रुपये की रिश्वत दी थी।
अन्य अभ्यर्थियों से भी 12 से 20 लाख रुपये तक वसूल कर सेटिंग कराई गई थी। परीक्षा का जिम्मा ‘वेबेल’ एजेंसी के पास था, जिसने सहयोगी एजेंसी ‘आईसीएन’ को काम सौंपा था। जांच में पुष्टि हुई है कि प्रश्नपत्र छपाई से लेकर स्ट्रांग रूम तक ले जाने के दौरान आईसीएन के स्तर से ही पेपर लीक किया गया था। सीआईडी अब गिरफ्तार राजन से पूछताछ कर इस गिरोह के बाकी चेहरों को बेनकाब करने में जुटी है।
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