
जमशेदपुर : मोबाइल फोन, लैपटॉप और लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत अब सिर्फ थकान की वजह नहीं रह गई है, बल्कि युवाओं में गर्दन, कमर, कंधे और रीढ़ से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ा रही है। लगातार स्क्रीन देखने और गलत पोस्चर में बैठने के कारण कम उम्र में ही लोगों को दर्द, अकड़न और शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के मौके पर फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. गौतम भारती ने युवाओं को अपनी दिनचर्या और बैठने के तरीके में सुधार करने की सलाह दी।
घंटों मोबाइल और लैपटॉप के सामने बैठना बना परेशानी
डॉ. गौतम भारती के अनुसार, आज की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। युवा कई-कई घंटे मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करते हैं। इस दौरान गर्दन लगातार नीचे झुकी रहने और पीठ को सही सपोर्ट नहीं मिलने से मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शुरुआत में यह परेशानी हल्के दर्द या अकड़न के रूप में दिखाई देती है, लेकिन लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने पर समस्या बढ़ सकती है।
गलत पोस्चर से गर्दन और कमर पर असर
फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. गौतम भारती ने बताया कि लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। मोबाइल चलाते समय गर्दन झुकाकर रखने से गर्दन और कंधे की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है। वहीं, कुर्सी पर गलत तरीके से बैठने से कमर और रीढ़ पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। इसलिए काम के दौरान सही पोस्चर बनाए रखना बेहद जरूरी है।
दर्द होने पर सिर्फ दवा पर निर्भर न रहें
डॉ. भारती के मुताबिक, शरीर में लगातार दर्द, अकड़न या गतिविधियों में परेशानी महसूस होने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर दर्द में केवल दर्द की दवा लेना स्थायी समाधान नहीं है। समस्या के कारण की पहचान कर उसके अनुसार फिजियोथेरेपी, व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव मददगार हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से जांच और सलाह लेना जरूरी है।
हर दिन शरीर को दें थोड़ी ‘मूवमेंट’
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलें और शरीर को स्ट्रेच करें। नियमित शारीरिक गतिविधि, सही बैठने की स्थिति और स्क्रीन के इस्तेमाल में संतुलन बनाकर गर्दन और कमर से जुड़ी कई परेशानियों से बचाव किया जा सकता है।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस का उद्देश्य भी लोगों को शारीरिक सक्रियता, पुनर्वास और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। बदलती जीवनशैली में फिजियोथेरेपी की भूमिका केवल चोट या ऑपरेशन के बाद की रिकवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि दर्द और शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में भी इसका महत्व बढ़ रहा है।
Read Also- Potka Murder: प्रेमिका ने पति संग रची साजिश, सुपारी देकर प्रेमी सिकंदर की हत्या

