रांची : पूरे राज्य में एक बार फिर मानसून सक्रिय है। राजधानी रांची समेत आसपास के जिलों में रह रहकर बूंदाबांदी हो रही है। जिससे गर्मी से राहत मिलने के साथ साथ किसानी को भी बल मिल रहा है। राज्य के कई हिस्सों में अगले चार दिनों अच्छी वर्षा के आसार हैं। खासकर राज्य के उत्तर पूर्वी यानी देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़, साहेबगंज और मध्य भाग यानी रांची, रामगढ़, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, बोकारो में वर्षा होने की संभावना है।
पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम में भारी वर्षा के संकेत हैं। इस कारण मौसम विज्ञान केंद्र रांची ने बाकायदा येलो अलर्ट जारी किया है। इन दो जिलों में तेज वर्षा के साथ मेघ गर्जन और वज्रपात की भी संभावना है। लोगों को सतर्क रहने और जरुरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलने की हिदायत दी गई है। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो राज्य के कई हिस्सों में वर्षा हुई है। कहीं कहीं भारी वर्षा हुई है।
सबसे अधिक सिमडेगा के पाकरटंड में 212.4 मिमी वर्षा हुई है। जबकि सबसे अधिक अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री गोड्डा का और सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.3 डिग्री रांची का रिकार्ड किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के वरीय विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में अगले चार दिनों में अच्छी वर्षा होने की संभावना है। 2 अगस्त को लातेहार, लोहरदगा और सिमडेगा में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है। जबकि अन्य तीन दिनों के लिए अलर्ट जारी कर कुछ स्थानों पर वज्रपात की चेतावनी है।
सामान्य से 47 प्रतिशत कम हुई वर्षा :
जून और जुलाई माह में राज्य में हुई कम वर्षा के कारण किसानी काफी प्रभावित हुई है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से दोबारा मानसून के सक्रिय होने से खेतों में पानी तो भर गया है लेकिन धान के बिचड़ों को दोबारा खेतों में डालना पड़ा। इससे पूर्व बिचड़े सूख चुके थे। पूरे राज्य में सामान्य से 47 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।
मौसम विभाग की ओर से 17 जिलों में हालात ठीक नहीं है। पांच जिले चतरा, दुमका, गिरिडीह, जामताड़ा और लोहरदगा में सुखाड़ की स्थिति है। राज्य में 15 प्रतिशत ही धान की रोपाई हो सकी है। मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद ने कहा कि लो प्रेशर मध्य भारत की ओर चला गया है। जिसका असर झारखंड पर पड़ा है। उत्तरी बंगाल में निम्न दबाव यानी लो प्रेशर बना है लेकिन यह दक्षिणी ओडिशा होते हुए मध्य भारत चला गया है। टर्फ लाइन नार्मल पोजिशन से नीचे दक्षिण की ओर बना है इस कारण राज्य में औसत से कम वर्षा हुई है।
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