बोकारो : Steel Authority of India Limited (SAIL) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। कंपनी प्रबंधन ने करीब 22,000 ठेका श्रमिकों की छंटनी की योजना तैयार की है। यह कदम कंपनी के लागत नियंत्रण और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
योजना के तहत बोकारो इस्पात संयंत्र सहित SAIL की विभिन्न इकाइयों में कार्यरत ठेका मजदूरों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत तक कटौती की जाएगी। इस फैसले से अकेले बोकारो स्टील प्लांट के करीब 5,000 मजदूर प्रभावित होंगे। वर्तमान में SAIL में लगभग 1.10 लाख ठेका श्रमिक कार्यरत हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा।
तीन चरणों में होगी छंटनी, तय हुआ पूरा रोडमैप
कंपनी ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तय की है। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 31 मार्च 2027 तक यह छंटनी तीन चरणों में पूरी की जाएगी।
- अप्रैल से सितंबर 2026 तक : 10% कटौती
- अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक: 5% कटौती
- जनवरी से मार्च 2027 तक: 5% कटौती
- प्रबंधन का दावा है कि इस प्रक्रिया से उत्पादन या विभागीय कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बल्कि बचे हुए श्रमिकों को मल्टी-स्किल ट्रेनिंग देकर उनकी कार्यक्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि कम संसाधनों में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सके।
VRS से स्थायी कर्मचारियों पर भी दबाव
केवल ठेका मजदूर ही नहीं, बल्कि कंपनी अब अपने स्थायी कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या भी घटाने की तैयारी में है। SAIL बोर्ड ने 17 मार्च को हुई बैठक में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) को मंजूरी दे दी है।
इस योजना के तहत खासतौर पर उन कर्मचारियों को निशाना बनाया जाएगा, जो शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम नहीं हैं या जिनकी उत्पादकता कम मानी जा रही है। जो कर्मचारी VRS नहीं लेंगे, उन्हें मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देना होगा और सामान्य कर्मचारियों की तरह काम करना होगा।
2030 तक दोगुनी उत्पादन क्षमता का लक्ष्य
SAIL प्रबंधन ने वर्ष 2030 तक 35.65 मिलियन टन उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जो वर्तमान उत्पादन का लगभग दोगुना है। कंपनी का मानना है कि आधुनिकीकरण और विस्तार योजनाओं को सफल बनाने के लिए मानव संसाधन का पुनर्गठन जरूरी है।
इसी कारण ठेका श्रमिकों और अधिकारियों की संख्या कम करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इस फैसले से हजारों परिवारों के सामने रोजगार संकट खड़ा होने की आशंका भी जताई जा रही है।
रोजगार बनाम विकास की बड़ी बहस
SAIL का यह फैसला जहां एक ओर कंपनी को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह हजारों श्रमिकों के भविष्य पर सवाल खड़ा करता है। आने वाले समय में यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।

