पटना: बिहार के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत किशोर की तबियत मंगलवार सुबह अचानक बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उनका इलाज चल रहा है। जानकारी के मुताबिक, प्रशांत किशोर पिछले छह दिनों से बीपीएससी अभ्यर्थियों के समर्थन में आमरण अनशन पर थे, जो उनकी बिगड़ी हुई स्वास्थ्य स्थिति का मुख्य कारण बनकर सामने आया है।
भूख हड़ताल के कारण बिगड़ी तबियत
प्रशांत किशोर का स्वास्थ्य सोमवार की रात से ही खराब होना शुरू हुआ था। उनकी कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ गई थी, जिसके चलते उन्हें मंगलवार की सुबह एंबुलेंस के माध्यम से पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, वे पिछले पांच दिनों से केवल पानी पर निर्भर थे और लंबे समय से भोजन न करने के कारण शरीर में कमजोरी और डिहाइड्रेशन के साथ पेट में इंफेक्शन भी हो गया था।
मेगासिटी मेदांता अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अजीत प्रधान ने बताया, “प्रशांत किशोर पिछले कुछ दिनों से सिर्फ पानी पी रहे थे। खाना न खाने की वजह से उनकी सेहत बिगड़ी है। पेट में इंफेक्शन और डिहाइड्रेशन के कारण उनकी हालत नाजुक है। हम उनका इलाज कर रहे हैं और उनकी स्थिति को लेकर जल्द ही अपडेट देंगे।”
पुलिस कार्रवाई और अनशन की गिरफ्तारी
प्रशांत किशोर के अनशन की शुरुआत 6 दिन पहले बीपीएससी (बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन) के अभ्यर्थियों के समर्थन में हुई थी। वे गांधी मैदान में आमरण अनशन पर बैठे थे, ताकि राज्य सरकार से उनकी मांगों पर ध्यान दिया जा सके। सोमवार की सुबह करीब 4 बजे पटना पुलिस ने गांधी मैदान से उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार करने के दौरान उन्हें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि उन्हें थप्पड़ भी मारा गया।
पुलिस ने उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाने के बाद कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें कंडिशनल बेल (शर्तों के साथ जमानत) दी, लेकिन प्रशांत किशोर ने इसे लेने से इंकार कर दिया और अंततः बेउर जेल भेजे गए। हालांकि, बाद में उन्हें अनकंडिशनल बेल मिल गई, और वह शाम को जेल से बाहर आ गए।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद की स्थिति
प्रशांत किशोर के अस्पताल में भर्ती होने के बाद, उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। मंगलवार को उन्होंने अनशन की स्थिति के बारे में एक महत्वपूर्ण घोषणा करने की योजना बनाई थी, जिसमें वे अपने आगे के कदमों का खुलासा करने वाले थे। इस घोषणा के लिए पटना स्थित शेखपुरा हाउस में एक बैठक भी बुलाई गई थी, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ने के कारण इस बैठक को स्थगित करना पड़ा।
हालांकि, अस्पताल जाने के दौरान भी प्रशांत किशोर ने यह स्पष्ट किया कि वह अपने अनशन को जारी रखने का इरादा रखते हैं। उनका यह निर्णय उनके हौंसले और राज्य में बीपीएससी अभ्यर्थियों के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भविष्य के कदमों पर विचार
प्रशांत किशोर की तबीयत बिगड़ने के बावजूद, उनके समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि वह आगे किस प्रकार के कदम उठाएंगे। उनके अनशन का मुख्य उद्देश्य बिहार सरकार से बीपीएससी अभ्यर्थियों के लिए न्याय की मांग करना था, जो लंबे समय से अपनी नौकरी और परीक्षा के परिणामों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अब यह देखना होगा कि अस्पताल से ठीक होकर प्रशांत किशोर कब और किस तरह से अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। क्या वे फिर से अनशन पर बैठने की योजना बनाएंगे या अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे, यह समय ही बताएगा।
प्रशांत किशोर के अनशन ने राज्य में एक बड़ी राजनीतिक बहस को जन्म दिया है, और उनके स्वास्थ्य के बारे में जारी अपडेट उनकी आगामी गतिविधियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं जारी हैं।

