एजुकेशन डेस्क, जमशेदपुर : राज्य के विश्वविद्यालयाें काे बेहतर बनाने की दिशा में राजभवन हर दिन नए टास्क दे रहा है। इसी क्रम में राजभवन ने सभी विवि काे टास्क दिया है कि वे अपने काे उत्कृष्ट विश्वविद्यालय बनाएं। इसके लिए उन्हें 9 अलग-अलग क्षेत्राें में काम करने काे कहा गया है। राजभवन के 9 सूत्रीय टास्क काे लेकर राज्यपाल सह कुलाधिपति सीपी राधाकृष्णन के ओएसडी (शिक्षा) डॉ. संजीव राय ने जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में शुक्रवार काे बैठक की।

इस दाैरान डॉ. राय ने विश्वविद्यालयाें काे उत्कृष्ट बनाने के लिए नौ विभिन्न आयामों को सामने रखा। सबसे पहले विजन और स्ट्रेटजी के अंतर्गत उन्होंने वर्ष 2023 से 2035 तक के दूरगामी लक्ष्यों और उन्हें पूरा करने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा की। लर्निंग रिसोर्स प्रोवाइडर के बारे में उन्होंने यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी के ऑटोमेशन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एडमिशन लेनेवाली छात्राओं के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन शुरुआत में ही हो, जिससे की वह लाइब्रेरी का प्रभावी उपयोग कर सकें।
वेबसाइट के बारे में उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी अगर एक विंडो है तो वेबसाइट एक ड्रॉइंग रूम है, जिसे हमेशा अपडेट करना आवश्यक है। वेबसाइट गतिशील और आकर्षक होना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिया कि संस्थान को हर कदम पर राजभवन की ओर से पूर्ण रूप से सहयोग किया जाएगा। निश्चित रूप से सभी बाधाओं को दूर किया जाएगा। इस बैठक में रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर, डीएसडब्ल्यू, कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन, सभी संकायों के डीन, डायरेक्टर, आईक्यूएसी, को-ऑर्डिनेटर, स्पोर्ट्स एंड कल्चर कमिटी, एफओ, सीवीसी एवं डीओ उपस्थित थे।
रिसर्च व इनाेवेशन बेहद जरूरी
डॉ. संजीव राय ने विश्वविद्यालयाें में रिसर्च व इनोवेशन पर जाेर देते हुए कहा कि यह बेहद जरूरी है। इसके लिए फैकल्टी और छात्राओं काे हमेशा तत्पर रहना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि इसके जरिए ही छात्राओं में छिपी प्रतिभा का बाहर लाया जा सकता है। उन्हाेंने गवर्नेंस, लीडरशिप एंड मैंनेजमेंट के बारे में बताया कि सूक्ष्म स्तर पर विश्लेषण करते हुए बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करना प्रभावी नेतृत्व और प्रबंधन के कारण संभव हो सकता है।
उन्होंने टीचिंग, लर्निंग एंड इवेल्यूएशन के लिए कक्षागत व्यवहारों, शिक्षण रणनीतियों, अधिगम वातावरण आदि में संरचनात्मक परिवर्तन पर जोर दिया। इसी क्रम में अगले बिंदु पर चर्चा करते हुए उन्होंने टीचिंग लर्निंग एंड स्टूडेंट सपोर्ट को अधिगम प्रतिफल से जोड़ा। बताया कि शिक्षा, शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के आपसी समन्वय का प्रतिफल है। इसलिए स्टूडेंट सपोर्ट शिक्षण की सफलता के लिए आवश्यक है।
डाॅ संजीव राय ने कहा कि झारखंड की क्षेत्रीय विशेषता को किसी भी कार्य एवं आयाम में मुख्य आधार मानकर योजना बनानी होगी। क्षेत्रीय संस्कृति, सामाजिक भावना और क्षेत्र की अपनी विशेषता हमेशा प्रतिबिंबित होनी चाहिए।
समय- समय पर खेल की गतिविधियां आयाेजित करें विवि
उन्हाेंने स्पोर्ट्स एंड करिकुलर एरिया को विस्तार देते हुए स्पोर्ट्स को अध्ययन के साथ महत्वपूर्ण अंग मानकर आगे बढ़ने की बात कही। साथ ही समय- समय पर खेल की विभिन्न प्रतियाेगिताओं काे विवि स्तर पर आयाेजित करने पर भी बल दिया। वहीं थिएटर एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स में उन्होंने एनएसडी एवं एफटीआईआई के साथ मिलकर कार्यशाला आयोजित करने एवं छात्राओं की संरचनात्मकता को उचित तरीके से प्लेटफार्म प्रदान करने को कहा।
सभी आयामों में उत्कृष्टता के लिए कार्य करने के लिए उन्होंने दो सूत्र भी प्रदान किए पहला कम्युनिकेशन अर्थात संप्रेषण एवं कोलाबोरेशन अर्थात सहयोग। उन्हाेंने कहा कि प्रभावी संप्रेषण किसी भी कार्य की आधारशिला है तथा किसी भी कार्य के लिए क्षेत्र प्रतिनिधि के साथ उत्कृष्ट संस्थान के रूप में स्थापित प्रतिनिधि संस्थानों के साथ सहयोग आवश्यक है।

