RANCHI: राज्य में फाइलेरिया को जड़ से खत्म करने की तैयारी है। वहीं इसके लिए विभाग ने पूरी तरह कमर कस ली है। लेकिन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए मरीजों का मिलना है। इसके अलावा दूसरी बड़ी चुनौती है कि लोग दवा खाने से इंकार कर रहे है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या विभाग दिसंबर 2027 तक राज्य को फाइलेरिया से पूरी तरह से मुक्त कर पाएगा। बता दें कि रांची वर्तमान में फाइलेरिया के 2801 एक्टिव केस हैं। जिनका इलाज चल रहा है। इसके अलावा लोगों में जांच के दौरान इसके वायरस मिलने की पुष्टि भी हुई है।
मच्छरों के काटने से फैल रही बीमारी
फाइलेरिया एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है। इससे शरीर में सूजन, विशेषकर हाथों और पैरों में गंभीर सूजन हो सकती है। राज्य सरकार ने 2027 तक झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन प्रभावित इलाकों में लोग एलबेंडाजोल और डीईसी जैसी दवाओं को खाने से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में नए मरीजों के मिलने की संभावना कई गुना अधिक हो जाती है।
लोगों को दवा के प्रति किया जा रहा जागरूक
विभाग ने फाइलेरिया को लेकर हाई प्रायोरिटी वाले इलाकों को चिन्हित किया है। जागरूकता फैलाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। हाई प्रायोरिटी वाले इलाकों की पहचान की गई है, जहां फाइलेरिया के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि देखी जा रही है। इसके साथ ही धर्म गुरुओं और ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि वे दवाइयां लें और बीमारी की चपेट में आने से बचें।
मरीजों की सर्जरी जारी
पिछले कुछ महीनों में 232 लोगों का हाइड्रोसेलेक्टोमी का ऑपरेशन किया गया है, जो कि फाइलेरिया के कारण शरीर में सूजन के इलाज के लिए किया जाता है। इसके अलावा 495 अन्य मरीजों को हाइड्रोसेलेक्टोमी के लिए चिन्हित किया गया है। विभाग का उद्देश्य न केवल मरीजों का इलाज करना है, बल्कि आगे बढ़कर फाइलेरिया के प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाना है। इस कड़ी में लोगों को दवा खाने के लिए जागरूक किया जा रहा है जिससे कि वे इस बीमारी की चपेट में आने से बचे।
नाइट ब्लड सर्वे में तीन प्रखंड से मरीज
स्वास्थ्य विभाग फाइलेरिया का पता लगाने के लिए नाइट ब्लड सर्वे करता है। जिससे पता लगाया जाता है कि किस इलाके के लोगों में फाइलेरिया के वायरस एक्टिव है। ऐसे में रांची के तीन प्रखंड कांके, सोनाहातू और तमाड़ में इसकी पुष्टि हुई है। ऐसे में लोगों से अपील की जा रही है कि वे दवा खाए और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करे। चूंकि ये मच्छर के काटने से फैलता है। ऐसे में प्रभावित लोगों को मच्छरों से भी बचने की जरूरत है। चूंकि मच्छर फाइलेरिया के मरीजों को काटने के बाद दूसरों को भी इंफेक्टेड कर सकता है। इसलिए लोगों से मच्छर दानी का इस्तेमाल, शरीर को पूरी तरह कवर करने वाले कपड़े पहनने की अपील भी की गई है। वहीं सबसे ज्यादा जरूरी फाइलेरिया की दवा का सेवन करने को बताया गया। जिससे कि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि जहां लोग दवा नहीं खा रहे है उसके लिए योजना बनाई गई है। लक्ष्य का समय भी नजदीक है। प्रभावित इलाकों में दवा खाने की लोगों से अपील की गई है। चूंकि दवा ही इसका एक मात्र बचाव है। प्रभावित लोगों में तो इसके लक्षण दिख जाते है। लेकिन इसके वायरस पूरी तरह से फिट दिखने वाले लोगों में भी होते है। ऐसे में दवा खाने से इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है। सभी लोग जागरूक होकर दवा खाए तो इस बीमारी को खत्म कर सकते है।
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