
रांची: रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी के नए नियमों को लेकर शोधार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। नए रेगुलेशन के कारण अपनी पढ़ाई और भविष्य पर मंडराते संकट से नाराज आदिवासी-क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी विभाग के छात्रों ने बुधवार को यूनिवर्सिटी कैंपस का घेराव किया। प्रदर्शन के बाद छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मिलकर अपनी समस्याएं रखीं।
टीआरएल के छात्रों के लिए बनी बात
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आदिवासी और क्षेत्रीय भाषा विभाग के छात्रों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। दरअसल, विभाग में प्रोफेसरों की कमी के कारण छात्रों को पीएचडी गाइड नहीं मिल पा रहे थे।
अब यूनिवर्सिटी ने नई व्यवस्था के तहत मानविकी संकाय के शिक्षकों को टीआरएल छात्रों का गाइड बनाने की तैयारी की है। डॉ. परवेज हसन ने बताया कि मल्टीडिसिप्लिनरी (बहुविषयक) पढ़ाई के तहत इस फैसले को एकेडमिक काउंसिल से मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, इसके लिए संबंधित शिक्षक के पास सीट खाली होना जरूरी होगा।
अंग्रेजी विभाग के 60 छात्रों पर अटका फैसला
एक तरफ जहां टीआरएल छात्रों की राह आसान हुई है, वहीं अंग्रेजी विभाग के 60 शोधार्थी अब भी अधर में लटके हैं। इन छात्रों ने साल 2024 के नोटिफिकेशन के तहत एडमिशन लिया था। आवेदन और एडमिशन फीस के तौर पर हजारों रुपये जमा करने के बाद छात्रों ने दिसंबर 2025 में अपना कोर्स वर्क और परीक्षा भी पूरी कर ली थी।
अब यूनिवर्सिटी प्रशासन अचानक नए पीएचडी रेगुलेशन का हवाला देकर आगे की प्रक्रिया को रोक रहा है। छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने पुराने नियमों के तहत एडमिशन लिया और परीक्षा दी, तो अब उन पर नए नियम थोपना सरासर गलत है। इससे उनका पैसा और साल दोनों बर्बाद होने की कगार पर हैं।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कुलपति से मांग की है कि जिन्होंने पुराने नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी कर ली है, उन्हें उसी आधार पर पीएचडी आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाए। यूनिवर्सिटी प्रशासन से ठोस आश्वासन मिलने तक छात्रों ने अपनी लड़ाई जारी रखने की चेतावनी दी है।

