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RANCHI NEWS : एक प्लांट की कैपेसिटी 150 मीट्रिक टन की, निगम आधा भी नहीं दे रहा गीला कचरा

रांची के झिरी में गेल ने लगाया है गैस प्रोडक्शन के लिए 300 मीट्रिक टन का प्लांट

by Vivek Sharma
झिरी गैस प्लांट
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RANCHI : झारखंड की राजधानी रांची में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने और गीले कचरे से गैस उत्पादन की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल प्रभावित होती दिख रही है। रांची नगर निगम द्वारा झिरी डंपिंग यार्ड में स्थापित बायो कंप्रेस्ड गैस (सीबीजी) प्लांट को पर्याप्त मात्रा में गीला कचरा नहीं मिल पा रहा है, जिससे इसकी कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा है। वहीं रांची नगर निगम प्लांट को क्षमता से आधा भी गीला कचरा नहीं दे पा रहा है। ऐसे में प्लांट का प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है।

150 मीट्रिक टन क्षमता वाले दो प्लांट

जानकारी के अनुसार झिरी डंपिंग यार्ड में गैस उत्पादन के उद्देश्य से गेल द्वारा 150-150 मीट्रिक टन क्षमता वाले दो प्लांट लगाए गए हैं। इन दोनों प्लांटों को रोजाना करीब 300 मीट्रिक टन गीले कचरे की आवश्यकता होती है ताकि उससे गैस तैयार कर उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जा सके। इस गैस का इस्तेमाल वाहनों के ईंधन के रूप में भी किए जाने की योजना है। हालांकि नगर निगम फिलहाल जरूरत के मुकाबले आधा गीला कचरा भी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। जिससे प्रोडक्शन बड़े स्तर पर नहीं हो पा रहा है।

6500 मीट्रिक टन निकलता है कचरा

रांची शहर में घरों, बाजारों और विभिन्न प्रतिष्ठानों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। इसके बावजूद प्लांट को पर्याप्त गीला कचरा नहीं मिलने की मुख्य वजह कचरे का सही तरीके से अलग-अलग संग्रह नहीं होना है। नगर निगम ने पहले ही लोगों को घरों में गीला और सूखा कचरा अलग रखने का निर्देश जारी किया था। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए गए और घर-घर पर्चियां भी बांटी गईं, जिनमें साफ तौर पर कचरे को अलग-अलग रखने की अपील की गई थी। लोगों ने कचरा अलग रखना भी शुरू किया। लेकिन कूड़ा कलेक्शन वाली गाड़ियों में कचरा एक साथ ही उठाया जा रहा है। ऐसे में जब कचरा ट्रांसफर स्टेशन पहुंच रहा है तो सूखा गीला कचरा अलग करने में समय लग रहा है।

करोड़ों का प्रोजेक्ट हो जाएगा बर्बाद

करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किस गैस प्लांट का इस्तेमाल बेहतर ढंग से किया जाए तो गीले कचरे का प्रॉपर डिस्पोजल किया जा सकता है। वहीं निगम भी कचरा अलग अलग कलेक्ट करे तो ये प्रोजेक्ट बर्बाद होने से बच जाएगा। वहीं शहर को वैकल्पिक ईंधन का एक नया स्रोत भी मिलेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी का सहयोग नहीं मिला तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना अपने उद्देश्य को पूरा करने में पीछे रह सकती है।

क्या कहते है नगर आयुक्त

इस मामले में रांची नगर निगम के नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि हम लोग गीला कचरा ज्यादा से ज्यादा देने का प्रयास कर रहे हैं। लगभग 70 से 75 टन हर दिन गीला कचरा प्लांट को दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है हर दिन पूरे शहर से कचरे का उठाव हो। शहर में 85 परसेंट हर दिन कचरे का उठाव डोर टू डोर से हो रहा है जिसे बढ़ाने पर फोकस है। मिक्स कचरे को अलग करने में थोड़ा टाइम लग रहा है। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है और सफाई कर्मियों को भी।

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